आध्यात्मिक ज्ञान

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सच्ची सहनशीलता

 

परिचय: एक गहरा सवाल

क्या आपने कभी सोचा है कि सहनशीलता का असली मतलब क्या है? क्या यह सिर्फ़ तारीफ़ सुनकर मुस्कुरा देना है, या फिर इसका कोई और भी गहरा अर्थ है जो हमारी समझ से परे है? हम अक्सर सहनशीलता को एक सामान्य गुण मान लेते हैं, लेकिन इसकी सच्ची गहराई हमें आत्म-सुधार के एक नए मार्ग पर ले जा सकती है।

सहनशीलता का प्रचलित भ्रम

हममें से ज़्यादातर लोग यही मानते हैं कि अगर हमारी कोई प्रशंसा करे और हम मुस्कुराकर उसे स्वीकार कर लें, तो हम सहनशील हैं। लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो, “कोई प्रशंसा करें और मुस्कुराए इसको सहान शीलता नहीं कहते…”। यह तो एक सामान्य सामाजिक व्यवहार है, सहनशीलता की परीक्षा यहाँ से शुरू भी नहीं होती। यह तो बस सतह है, जबकि असली सहनशीलता की गहराई कहीं और है।

सहनशीलता की असली कसौटी

सहनशीलता की असली परीक्षा तब होती है जब परिस्थितियाँ हमारे विपरीत होती हैं। कल्पना कीजिए, कोई आपका दुश्मन बनकर क्रोधित हो और आप पर अपशब्दों की वर्षा करे। ऐसे समय पर भी सदा मुस्कुराते रहना ही सच्ची सहनशीलता की पहचान है। यह वह अवस्था है जब किसी के कटु शब्दों के उत्तर में हमारे मन में उठा एक संकल्प भी चेहरे पर शिकन ना ला सके।

…क्या ऐसी शांति संभव है?

हाँ, यह संभव है। यह केवल बाहरी मुस्कुराहट नहीं, बल्कि मन की उस अटूट शांति का प्रमाण है, जहाँ बाहरी आक्रमण हमारे आंतरिक जगत को भेदने में पूरी तरह असमर्थ हो जाता है।

सहनशीलता का सर्वोच्च शिखर: दुश्मन के लिए भी रहम

सहनशीलता का स्तर और भी ऊँचा उठता है जब हम केवल अपमान को सहते नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के प्रति भी करुणा का भाव रखते हैं जो हमारा अपमान कर रहा है। दुश्मन आत्मा को भी रहम-दिल की भावना से देखना, उससे उसी भावना से बोलना और संपर्क में आना, यही सहनशीलता का शिखर है। यह वह अवस्था है जहाँ क्रोध और घृणा के बदले मन में केवल दया और प्रेम का भाव रह जाता है। इस अवस्था में दुश्मन, दुश्मन नहीं रहता, बल्कि एक ऐसी आत्मा लगने लगता है जिसे प्रेम और शांति की आवश्यकता है।

निष्कर्ष: आत्म-चिंतन का क्षण

सच्ची सहनशीलता केवल अपमान सहने की कला नहीं है, बल्कि यह अपने मन को इस हद तक शांत और प्रेमपूर्ण बनाने की साधना है कि दुश्मन की आत्मा के प्रति भी मन में करुणा का भाव जागे। यह प्रशंसा में मुस्कुराने से कहीं बढ़कर, घोर विरोध में भी अविचल और दयालु बने रहने की शक्ति है। आइए, हम सब एक क्षण रुककर सोचें कि हम अपनी सहनशीलता को इस गहरी समझ के साथ अपने जीवन में कैसे उतार सकते हैं।

आगे की राह

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