संगठन क्लास –18.06.2023 | VCD 2117 | अव्यक्त वाणी 12.02.2016 | आध्यात्मिक ज्ञान
- मुरली क्लास
- 17 June 2023
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- 176
अव्यक्त वाणी 12.02.2016
सायंस के साधनों ने मिलन का रास्ता बहुत सहज बनाय दिया है लेकिन सबसे अच्छी याद दिल की है दिल में बाबा बाबा याद हो। बाबा ही दिल में समाया हुआ हों ।- संगठन क्लास 18.06.2023
सभी बापदादा के लाडले बच्चों को देख बापदादा भी बहुत हर्षित हो रहे हैं क्योंकि हर बच्चा बाप को कितना प्यारा है हरेक का चेहरा देख बापदादा के मन में एक एक बच्चे की सूरत में बाप की मूरत देख बाप को भी कितना हर्ष होता है। जैसे बच्चों की हर शक्ल में बाप को देख बाप हर्षित होते हैं ऐसे ही हरेक भारत या विदेश दोनों तरफ के बच्चे को साकार में सामने देख बाप कितना खुश होते हैं। देखने वाला बाप साकारी हैं निराकारी हैं या आकारी हैं? क्या है? और किनको देख रहा है? साकार बच्चों को देख रहा है आकारी सूक्ष्म शरीर धारी बच्चों को देख रहा है या निराकारी स्टेज में टिकी हुई आत्माओं को देख रहा है? हें? निराकारी बच्चों को देख रहा है?? आत्मा माने निराकारी। लेकिन यहाँ बोला बच्चों को साकार में सामने देख बाप कितना खुश होता हैं! सामने कब देखा जाता है? बिंदु रूप बनकर के सामने देखा जाता हैं सूक्ष्म रूप से सामने देखा जाता है या देखने वाला साकार हो तब सामने देख सकता है? वाह! हरेक बच्चा वाह! सबके नयन अति प्यारे और प्यारे दिखाई दे रहे हैं क्योंकि हरेक की दिल यही बोल रही है वाह बाबा वाह! जो साकार रूप मे बाप और बच्चों का ये मिलन कितना प्यारा है! क्या कहा?हें? वाह बाबा वाह कब? जब साकार रूप में बाप और बच्चों का मिलन बहुत प्यारा रहा! कहां की बात है? उन बेसिक ब्राह्मणों की बात है या एडवांस के ब्राह्मणों की बात है? जो साकार रूप में बाप स्पष्ट बोल दिया और बच्चे भी साकार रूप में। कितने समय के बाद साकार में बापदादा बच्चों को देख और बच्चे भी बाप को देख कितना हर्षित होते हैं! हरेक के दिल में ये गीत बज रहा है वाह बाबा वाह! वाह वाह के गीत क्यों निकल रहे हैं?हें? क्योंकि दुनिया वालों की तो बात ही छोड़ो ब्राह्मणों की बेसिक और एडवांस की दुनिया इतनी बड़ी हैं उनमें भी एडवांस के थोड़े बच्चे साकार में बाप को सामने देख रहे है और बाप के दिल में भी यही गीत है वाह बच्चे वाह! बाप के दिल में क्यों है? बाप के दिल में इसलिए हैं इतनी बड़ी दुनिया के अंदर कौटो में कोउ निकले बेसिक में और बेसिक में से कौटो मे से भी कोई कोई बच्चे निकले! हरेक बच्चे के इन आँखों में साकार वतन में ये मुलाकात कितनी प्यारी हैं! संगठन क्लास 18.06.2023
इस घडी मेजोरिटी हर बच्चे सन्मुख बाप को देख दिल में और मुख में मेराबाबा! यही गीत सुन रहे हैं। किसको देख? हें? सन्मुख में बाप को देख हरेक के दिल में मेराबाबा भी वारंवार हैं और नंबरवार हैं लेकिन समाया हुआ है मेराबाबा और बाप के दिल में कौन है₹ मेरे बच्चे! तो इतना सन्मुख मिलन मनाते देखकर के सबकी दिल हर्षित हो रही है बाप भी एक एक बच्चे की दिल की याद का फोटो देखकर के हर्षित हो रहे हैं वाह बच्चे वाह! ये मिलन सन्मुख मिलन हैं चाहे किसीके द्वारा हैं! क्या कहा? मिलन कैसा है? सन्मुख मिलन लेकिन क्या बोल दिया? किसीके भी द्वारा हैं तो जरूरी नहीं कोई बडे कहे जाने वाले ब्रह्मा कुमार दादा दादी या दिदी के द्वारा हैं लेकिन ये मिलन इस मिलन का अनुभव साधारण नहीं है बाप के दिल में इतने सब बच्चे बाप के दिल में समाये हुए हैं।-
भक्ति में ऐसे नहीं सोचा था कि ऐसे प्रभु मिलन हम बच्चों के भाग्य में है भक्ति में कभी जब भक्ति करते थे तो कोई ने ऐसा सोचा था कि भगवान हमको सन्मुख साकार मे मिलेगा? लेकिन ड्रामा कहें या तकदीर कहे हरेक बच्चे के भाग्य को देख बाप को कितनी खुशी होती है वाह बच्चे वाह! ऐसा मिलन जैसे सन्मुख मिल रहे हैं तो इसको कहेंगे मिलन का मौका मिला हुआ है ड्रामा मे। बहुत अच्छा माना आनंद में आ जाता है भले रूप दूसरा हैं.. क्या कहा? दूसरा रूप क्या है?हें? जिसके द्वारा मिलते है बाप उसका भले रूप कैसा है? वो रूप नहीं है जो दादा लेखराज द्वारा था या वो रूप नहीं है जो कथाकथित ब्राह्मण समझे बैठे हैं। क्या समझे बैठे हैं? कि परमधाम वासी शिव ज्योतिबिंदु सूक्ष्म शरीर धारी ब्रह्मा में आता है और फिर दोनों आत्मा मिलकर के गुलजार दादी में आती है! ऐसा नहीं है भले रूप दूसरा हैं फिर भी मिलन तो हैं ना! इस मिलन में क्या भासना आती है? बाप हमसे मिलने आया है! क्या भासना आती हैं? हमको बाप के पास नहीं जाना पड़ता लेकिन बाप हमारे पास आया है। बच्चे बाप से मिलने आये हैं ऐसा भाग्य साकार रूप में ऐसे मिलेगा ये ड्रामा में नूंधा हुआ है।
बार बार साकार शब्द क्यों बोल रहे हैं?हें? इसलिए बोल रहे हैं कि धृतराष्ट्र जो अंधा है उस अंधे कि औलाद जो अंधे हैं उनकी भी आँखें? उनकी भी आँखें खुल जाए। तो साकार रूप में बाप में बाप मिलेगा ये देखकर के कितने हर्षित हो रहे हैं। अभी बाबा की एक ही हर बच्चे के साथ ये दिल हैं हरेक की दिल यही कहती है बच्चा हरेक बाप के दिल में समाये हुए हैं। और समाते समाते इतनी खुशी का अनुभव करते हैं जो करते हुए भी दिल नहीं पूरी होती है। दिल में हर समय यही निकलता है ऐसा बाबा और वो भी इस पापी युग में कलियुग में ऐसी चीज मिली कितना हमारा भाग्य। परन्तु सायंस वालों को थेंक्स देते हैं जो ऐसा मिलन के रास्ते बनाए है जो सन्मुख मिलन न होते हुए भी सन्मुख का अनुभव कराते हैं जिनके पास में स्मार्ट फोन होता है कंप्यूटर होता है लेपटॉप या टेबलेट होती है वो उस स्मार्ट फोन स्काइप के द्वारा वोट्सअप के द्वारा फोटो देखते हैं दुनिया के दूसरे कोने पर बैठते हुए फोटो देख लेते हैं आँखें भी मिलाय सकते हैं दृष्टि से एक दूसरे को देख भी सकते हैं। चाहे तो बाप और बच्चे बात भी कर सकते हैं तो देखो सन्मुख नहीं होते हुए भी ये सायंस के साधन सन्मुख मिलन का अनुभव कराते हैं।नये बच्चों का अनुभव देख और सुनकर बाप भी हर्षित होता है।
बाप बच्चे को देख खुश होते हैं और बाप बच्चे दोनों जब मिलके खुश होके मिलते तो आप अनुभवी हैं और ये सायंस वालों को बापदादा निमित्त बनने वाले देखकर के दिल ही दिल में उनके भी गीत गाते हैं कि वाह! ये बाप और बच्चे का मिलन सदा होता रहे ये मिलन कितना अच्छा ड्रामा में है लेकिन ड्रामा में इतना ही है फिर भी सायंस ने मिलन का रास्ता बहुत सहज बताय दिया है। सामने दिखाई भी देता है सुनने में भी आता है! क्या? सन्मुख मिलन न होते हुए भी जो विदेश में बैठे हैं दूर बैठे हैं वो सामने दिखाई भी देता है सुनने में भी आता है तो बापदादा भी बच्चों को देखते हैं कितने खुश हो जाते हैं लेकिन कलियुग में साधन तो बहुत अच्छा बनाया फिर भी सामने भासना तो देते हैं ना! कुछ भी हां रूबरू की भासना तो नहीं हो सकती है लेकिन फिर भी बाबा की शक्ल बाबा के नयन बाबा के चयन मिलन ये भी एक समय का वंडर हैं! जो संगम युग का वंडर हैं तो सभी बच्चे खुश हो जाते हैं ना! देखकर के बात करते हैं मिलते खुश हो जाते है इसलिए कोशिश करते हैं कि मधुबन चलों और बाप भी हर बच्चे को देख कितना खुश होगा सारे ड्रामा मे ये मिलन भी विचित्र हैं तो जब भी ऐसा दिल होता है तब हर बच्चा कोशिश करता है कि हम पहुंच जाए! कहाँ?हें? अरे मधुबन या मिनी मधुबन में पहुंच जाए।
हरेक के दिल में बाप की याद सदा रहती है। सदा रहती हैं या मुश्किल है? पूछा बाप की याद सदा रहती है या याद करना मुश्किल है?हें? ऐसे क्यों पूछा? इसलिए पूछा कि जिन्होंने अभी तक साकार में नहीं देखा है नहीं जाना है ये बेसिक वाले ब्राह्मण हैं उन्होंने बाप को दूसरे रूप में न देखा है न जाना है। साकार में न देखने के कारण न जानने के कारण उनको याद करना मुश्किल है या सहज है? उनके लिए मुश्किल है। जो समझते हैं कि बाप की याद भूलना मुश्किल है वो हाथ उठाना! अच्छा बोलना मुश्किल है? फिर क्या करते हो आप? दिल में ही समाय देते हो और कही बच्चों को देखा है इतना दिल में याद आता है कि चुपचाप बैठे रहे अकेले लेकिन ऐसे ही बैठे जैसे कोई सामने कोई बात कर रहा है! सभी को पता है कि ये मिलन का दिवस बहुत अमूल्य हैं। फिर भी सायंस वालों को थेंक्स तो देगे ना!
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