आलस्य छोड़कर फ़रिश्ता कैसे बनें: एक साल में सम्पूर्ण परिवर्तन का आध्यात्मिक रहस्य- Adhyatmik Gyan

आलस्य छोड़कर फ़रिश्ता कैसे बनें: एक साल में सम्पूर्ण परिवर्तन का आध्यात्मिक रहस्य- Adhyatmik Gyan

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  • 23 October 2025
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“आलस्य” आत्मा की उड़ान में सबसे बड़ी बाधा

आलस्य – आत्मा की उड़ान में सबसे बड़ी बाधा

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी आध्यात्मिक यात्रा में सबसे बड़ी बाधा क्या है? यह कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि एक आंतरिक अवस्था है जिसे हम ‘आलस्य’ कहते हैं। लेकिन यह आलस्य केवल एक आदत नहीं, यह एक गहरा आध्यात्मिक अवरोध है। यह उस एक विचार से जन्म लेता है जो आत्मा को पुरानी दुनिया के बंधनों में जकड़े रखता है: ‘चलता है’।

जब आप इस सोच को अपनाते हैं, तो आप अपने पुरुषार्थ को तीव्र होने से रोक देते हैं। इसका परिणाम? बापदादा कहते हैं कि आप मंज़िल की ओर “चलेंगे” तो ज़रूर, लेकिन आप “उड़” नहीं पाएंगे। और आपकी नियति चलना नहीं, उड़ना है। आलस्य वह अदृश्य जंजीर है जो हमें उस नई, दिव्य दुनिया तक पहुँचने से रोकती है, जहाँ केवल देवदूत, यानी फ़रिश्ते ही प्रवेश कर सकते हैं।

मुख्य संदेश: यह केवल शारीरिक थकान नहीं, आत्मिक ऊर्जा का अभाव है

आलस्य का जो स्वरूप हम देखते हैं, वह तो मात्र ऊपरी सतह है। इसका एक सूक्ष्म और ‘शाही स्वरूप’ भी है, जो हमारी आध्यात्मिक प्रगति को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। इस शाही आलस्य का मूल स्रोत एक बहुत ही साधारण सी लगने वाली सोच है: ‘चलता है।’

यह ‘चलता है’ की मानसिकता, जो साधारण और औसत को स्वीकार कर लेती है, आत्मा की ऊर्जा को सोख लेती है। जब हम अपनी कमियों और पुराने संस्कारों को यह कहकर स्वीकार कर लेते हैं, “अरे, कोई बात नहीं, चलता है,” या “अभी तो ऐसे ही चलने दो, भविष्य में देख लेंगे,” तो हम परिवर्तन के लिए आवश्यक आत्म-शक्ति खो देते हैं। यह एक सूक्ष्म ज़हर है जो हमें यह विश्वास दिलाता है कि हमें बदलने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है। यही आत्मिक ऊर्जा का अभाव है, जो शारीरिक आलस्य के रूप में प्रकट होता है।

परिवर्तन का दिव्य मार्ग: एक वर्ष में फ़रिश्ता स्वरूप बनें

परिवर्तन का मार्ग अब स्पष्ट है। बापदादा ने हम सभी आत्माओं को एक दिव्य चुनौती और अवसर प्रदान किया है: अधिकतम एक वर्ष के भीतर स्वयं को पूरी तरह से बदल देना। जैसा कि बापदादा कहते हैं, “बापदादा एक साल देते हैं, तो यह आसान है, है न? एक साल में आराम से परिवर्तन लाओ।”

इस परिवर्तन का अंतिम लक्ष्य है ‘फ़रिश्ता स्वरूप’ को धारण करना। लेकिन फ़रिश्ता का अर्थ क्या है?

फ़रिश्ता का अर्थ: वह जिसकी चेतना इस पुरानी दुनिया और इसके रिश्तों से परे है। वह शरीर और शारीरिक संबंधों के मोह से मुक्त आत्मा है।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह परिवर्तन वैकल्पिक नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य आध्यात्मिक आदेश है। चाहे आप चाहें या न चाहें, आपको फ़रिश्ता बनना ही होगा। पुरानी दुनिया के अंत और नई दुनिया के आगमन के बीच यह एक आवश्यक पड़ाव है, जिसे हर आत्मा को पार करना ही है।

आध्यात्मिक रहस्य: आत्मा की सोई हुई शक्तियों को कैसे जगाएं

इस महान परिवर्तन के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक विज्ञान छिपा है। इसकी शुरुआत ‘आराम’ शब्द के सही अर्थ को समझने से होती है। आराम का मतलब केवल शारीरिक विश्राम नहीं है। इसका वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ है: ‘आ राम’, अर्थात कोई भी कर्म करने से पहले, परमपिता परमात्मा (राम) को याद करो। जब आप पहले पिता को याद करते हैं और फिर कोई कर्म करते हैं, तो वह कर्म दिव्य बन जाता है और आपको थकाता नहीं, बल्कि ऊर्जा से भर देता है।

यही परमात्मा की याद की ऊर्जा आपके संकल्प को शक्ति देती है। आपके परिवर्तन का संकल्प एक बीज की तरह है। इस बीज को फल देने के लिए निरंतर पोषण की आवश्यकता होती है। ‘आ राम’ का अभ्यास ही वह आध्यात्मिक जल और धूप है, जो इस संकल्प रूपी बीज को सींचता है। जब आप अपने संकल्प को लगातार याद की ऊर्जा देते रहेंगे, तो यह निश्चित रूप से परिवर्तन का फल देगा।

व्यावहारिक उपाय: आलस्य पर विजय पाने के दैनिक अभ्यास

इस परिवर्तन के लिए बापदादा ने कुछ सरल और शक्तिशाली अभ्यास दिए हैं:

  1. सुबह का संकल्प (The Morning Resolution): अपने हर दिन की शुरुआत एक दृढ़ संकल्प के साथ करें: ‘हमें फ़रिश्ता बनना है’। यह संकल्प आपके पूरे दिन के लिए आध्यात्मिक दिशा तय करेगा और आपके हर कर्म को इस लक्ष्य से जोड़ देगा।
  2. निरंतर स्व-स्मृति (Constant Self-Remembrance): दिन भर चलते-फिरते, काम करते हुए स्वयं को यह दिव्य स्मृति दिलाते रहें: ‘मैं पिता के समान एक फ़रिश्ता हूँ; मेरे पुराने संस्कारों, पुरानी बातों से कोई संबंध नहीं है।’ यह स्मृति आपके पुराने देह-अभिमान और संस्कारों के प्रभाव को समाप्त कर देगी।
  3. अतीत पर बिंदी लगाएं (Put a Dot on the Past): सभी पुरानी बातों, झगड़ों, मतभेदों (“यह शंकर पार्टी है, यह ब्रह्मा पार्टी है…”), मोह और शिकायतों को सचेत रूप से समाप्त करें। जब आप अतीत पर एक बिंदी लगा देते हैं, तो आप अपनी बहुत सारी आध्यात्मिक ऊर्जा को मुक्त करते हैं जो व्यर्थ की बातों में उलझी हुई थी। यह आपको हल्का बनाता है और उड़ने में मदद करता है।

निष्कर्ष: जब आत्मा जागती है, आलस्य मिट जाता है

यह यात्रा ‘चलता है’ की सोच से जकड़ी हुई एक आत्मा से एक मुक्त और प्रकाश-स्वरूप ‘फ़रिश्ता’ बनने की है। आलस्य आत्मा के सोए होने का लक्षण है। शाही आलस्य का भ्रामक आराम आपको पुरानी दुनिया में फंसाए रखता है, जबकि फ़रिश्ता स्वरूप की उज्ज्वल स्वतंत्रता आपको मुक्ति दिलाती है।

अब चुनाव आपके हाथ में है: क्या आप ‘चलते रहने’ की साधारण अवस्था को चुनेंगे, या उड़ने के अपने दिव्य अधिकार को प्राप्त करेंगे? जब आप ज्ञान और याद की शक्ति से अपनी आंतरिक शक्तियों को जगाते हैं, तो आलस्य का अंधकार स्वतः ही मिट जाता है। यह केवल एक आदत को बदलना नहीं है; यह अपने वास्तविक, दिव्य स्वरूप में वापस लौटना है।

प्रेरणादायक पंक्तियाँ

जब आत्मा जागती है, तो आलस्य मिट जाता है और आत्मा फ़रिश्ता बन जाती है।

 

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