1. “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।” (गी. 4/7) अर्थात जब धर्म की ग्लानि होती है, अधर्म या विधर्म बढ़ता है, तब मैं आता हूं। धर्म की व्याख्या अर्थात् एक भाई भगवान को सर्व भाई बताते हैं। जैन और वैदिक प्रक्रिया के अनुसार कलियुग के अंत में ही धर्म की व्याख्या होती है; क्योंकि कलियुग-अंत तक अनेक धर्म स्थापित हो गये हैं और सभी धर्म चौथे युग की चौथी अवस्था में तमोप्रधान बन गये हैं; क्योंकि सृष्टि रूपी सामान्य मकान या वृक्ष की हर चीज चतुर्युगी की तरह सत्त्व प्रधान, सत्त्व, रजो और तामसी- इन 4 स्तरों में से एक है।
2. “सर्वभूतानि सम्मोहं सर्गे यान्ति परन्तप॥” (गीता 7/27) अर्थात् सभी जीव कल्पान्त काल/चतुर्युगान्त में सम्पूर्ण मूढ़ता को प्राप्त होते हैं।
3. अवजानन्ति मां मूढ़ा मानुषी तनुमश्रितम्। वो मूक धार्मिक के ईश्वर-समान स्वरूप को जल्दी पहचान नहीं पाते हैं।
कलियुग के अंत में भगवान का गायन कल्किधर के रूप में होता है, तो निश्चित रूप से उनके ऊपरी प्रेक्टिकल में शैलों की दरारें पड़ जाती हैं, इसलिए सभी कलियों को धारण करने वाले भगवान कल्किधर कहलाते हैं | जिसने भगवान को कहा, उसी ने भागवत को बनाया, और जिसने भगवान को कहा, उसी ने कलकीधर को भगवान बनाया।
नास्त्रेदमस की भविष्य वाणियों के ज्ञाता महाराष्ट्र के ज्योतिषाचार्य डॉ. रामचंद्र जोशी ने इस पर एक मराठी में पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का नाम है – ‘‘21 व्या शतकाकडे झेपावतांना जगातील सर्वश्रेष्ठ भविष्यवेत्ता मायकल द नास्त्रेदमस (नास्त्रेदमस) यांचे जागतिक स्तरावरचे भविष्य’’। इस पुस्तक के पृष्ठ-32-33 पर नास्त्रेदमस की सेंचुरी का हवाला देते हुए लिखते हैं कि- ‘ठहरो स्वर्णयुग (रामराज्य) आ रहा है’। महासत्ता अधिकारी भारत ही नहीं, सारी पृथ्वी पर स्वर्णयुग लाएगा और अपने सनातन धर्म का पुनरुत्थान करके यथार्थ सर्वश्रेष्ठ हिन्दू राष्ट्र बनाएगा।
स्वतंत्रता के बाद भारत में एक ऐसे महापुरुष का उदय होगा, जो वैज्ञानिकों का भी वैज्ञानिक होगा। वह आत्मा और परमात्मा के रहस्य को प्रगट करेगा। आत्मज्ञान उसकी देन होगी। उसकी वेश-भूषा साधारण होगी। उसका स्वास्थ्य बालकों जैसा, योद्धाओं की तरह साहसी, अश्विनी कुमारों की तरह वीर युवा व सुन्दर, शास्त्रों का प्रकाण्ड पण्डित व मानवतावादी होगा।
अरब राष्ट्रों सहित मुस्लिम बहुल राज्यों में आपसी क्रांतियाँ और भीषण रक्तपात होंगे। इस बीच भारतवर्ष में जन्मे महापुरुष का प्रभाव व प्रतिष्ठा बढ़ेगी। यह व्यक्ति इतिहास का सर्वश्रेष्ठ मसीहा होगा। वह एक मानवीय संविधान का निर्माण करेगा, जिसमें सारे संसार की एक भाषा, एक संघीय राज्य, एक सर्वोच्च न्यायपालिका, एक झण्डे की रूप-रेखा होगी।
संसार के सबसे समर्थ व्यक्ति का अवतरण हो चुका है। वह सारी दुनिया को बदल देगा। उसकी आध्यात्मिक क्रांति सारे विश्व में छा जाएगी।…… एक ओर संघर्ष होंगे, दूसरी ओर एक नई धार्मिक क्रांति उठ खड़ी होगी जो आत्मा और परमात्मा के नए-2 रहस्य को प्रगट करेगी। …..वह महापुरुष 1962 से पूर्व जन्म ले चुका है। उसके अनुयायी एक समर्थ संस्था के रूप में प्रगट होंगे और धीरे-2 सारे विश्व में अपना प्रभाव जमा लेंगे। असंभव दिखने वाले कार्य को भी वे लोग उस महापुरुष की कृपा से बड़ी सरलता से संपन्न करेंगे।
भारत का अभ्युदय एक सर्वोच्च शक्ति के रूप में हो जाएगा; पर उसके लिए उसे बहुत कठोर संघर्ष करने पड़ेंगे। देखने में यह स्थिति अत्यंत कष्टदायक होगी; पर इस देश में एक फरिश्ता आएगा जो हज़ारों छोटे-2 लोगों को इकट्ठा करके उनमें इतनी आध्यात्मिक शक्ति भर देगा कि वे लोग बड़े-2 बुद्धिजीवियों की मान्यता मिथ्या सिद्ध कर देंगे।
अवतारी महापुरुष द्वारा जबरदस्त वैचारिक क्रांति होगी, जिसके फलस्वरूप शिक्षण पद्धति बदल जाएगी …..वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल पेट भरने तक ही सीमित है। …..कथित आत्मज्ञानहीन बुद्धिजीवियों से लोगों की घृणा होगी। ….भारतवर्ष का एक ऐसा धार्मिक संगठन नेतृत्व करेगा, जिसका मार्गदर्शक स्वयं भगवान होगा। धार्मिक आश्रम जन जागृति के केंद्र बनकर कार्य करेंगे।
ग्रेरार्ड क्राईसे (हॉलैंड):- भारत देश में एक ऐसे महापुरुष का जन्म हुआ है, जो विश्व कल्याण की योजनाएँ बनाएगा।
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‘महाभारी महाभारत गृहयुद्ध”। जिसके आसार अभी भारत में देखे जा रहे हैं।
मार्कण्डेय महाभारत में स्पष्ट प्रमाण है कि यह कलियुगांत और सत्युगादि के संगम पर होता है और पांडवों जैसी दिव्य आत्माओं द्वारा सतयुग आरम्भ होता है ।
{आध्यात्मिक ज्ञान }
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