क्या आपने कभी भोर की उस खामोशी को महसूस किया है, जब पूरी दुनिया सो रही होती है और एक दिव्य शक्ति आपको अपनी बाहों में समेटने के लिए पुकार रही होती है? यह केवल सुबह का एक पहर नहीं, बल्कि अमृतवेला है – एक ऐसा जादुई समय जब परमात्मा स्वयं अपने बच्चों से मिलने आते हैं। यह समय घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से महसूस किया जाता है। यह एक निमंत्रण है, उस निराकार सत्ता से रूह-रिहान करने का, जिसने हमें अपना बनाया है।
1. अमृतवेला का सच्चा अर्थ: सिर्फ़ जागना नहीं, जागृत होना
अक्सर लोग अमृत वेला को केवल सुबह जल्दी उठने की एक शारीरिक क्रिया समझ लेते हैं, लेकिन इसका सच्चा अनुभव इससे कहीं गहरा है। यह एक अलौकिक अनुभव है, एक ऐसी आध्यात्मिक जागृति का क्षण है जो आत्मा को नई ऊर्जा से भर देता है। यह कोई थकाने वाला नियम नहीं, बल्कि एक ऐसा दिव्य अनुभव है जिससे सारी थकान मिट जाती है। जैसा कि अव्यक्त वाणी में कहा गया है:
इस अमृतवेले के अलौकिक अनुभव में थकावट दूर हो जाती है।
यह एक सतो गुणी समय है, जब वायुमंडल में दिव्यता और पवित्रता अपने चरम पर होती है। इस समय जागना केवल आँखें खोलना नहीं, बल्कि अपनी आत्मा की आँखों को खोलकर उस परमपिता की याद में जागृत होना है।
2. दिव्य मिलन का विशेष क्षण
अमृतवेला का समय निराकार बापदादा के साथ एक व्यक्तिगत मुलाक़ात का समय है। यह एक ऐसी गहरी अनुभूति है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह वह विशेष क्षण है जब बाबा स्वयं अपने सभी बच्चों को याद करने के लिए चक्कर लगाने आते हैं। वाणी में भी इसका सुंदर वर्णन है:
अमृतवेले चक्कर लगाने बाबा आते हैं और उस समय बाप सभी को याद करते हैं।
सोचकर देखें… जब हम उन्हें याद करते हैं, ठीक उसी पल वो भी हमें याद कर रहे होते हैं। यह कितना अद्भुत और अनमोल मिलन है! यह एक दो-तरफ़ा प्रेम का अनुभव है, जहाँ याद करने वाले और याद आने वाले दोनों एक-दूसरे के स्नेह में समा जाते हैं।
3. एक मीठा उलाहना: हम अनुभव क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
इतने दिव्य समय के बावजूद, कई बार साधकों के मन में यह प्रश्न उठता है कि हम उस गहरे अनुभव को प्राप्त क्यों नहीं कर पा रहे हैं? बापदादा भी प्रेम से यही उलाहना देते हैं कि अमृत वेला का वह दिव्य वातावरण अभी उतना महसूस नहीं हो रहा है, और हम साधकों को स्वयं से पूछना चाहिए, ‘क्यों थक गए?’
समस्या यह है कि केवल उठकर बैठ जाना ही काफ़ी नहीं है। जब याद के शुद्ध अनुभव में दिन भर की सुस्ती आकर मिल जाती है, तो मिलन की लाइन ही क्लियर नहीं हो पाती। हम मुलाक़ात तो करना चाहते हैं, लेकिन मन और बुद्धि की लाइन पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती। जैसा कि वाणी में इशारा है:
मुलाक़ात करते हैं लेकिन लाइन क्लियर नहीं होती है इसलिए मुलाक़ात से जो अनुभव होना चाहिए वह नहीं कर पाते हैं।
4. अनुभव का सरल और सच्चा मार्ग
इस गहरे अनुभव को प्राप्त करने का मार्ग बहुत सरल और स्पष्ट है। इसे दो-चरणीय प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है:
पहला कदम: संकल्प की शक्ति
अमृतवेला में बैठने का सही तरीका क्या है? साधक को केवल बैठना नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प के साथ बैठना है। यह संकल्प करें:
अब हम अव्यक्त बापदादा से मुलाक़ात करें।
जब हम इस निश्चय के साथ बैठते हैं, तो हमारी बुद्धि स्वतः ही उस दिव्य मिलन के लिए तैयार हो जाती है।
दूसरा कदम: पूरे दिन की तैयारी
यह सबसे महत्वपूर्ण रहस्य है। अमृतवेला का अनुभव केवल सुबह के कुछ घंटों पर नहीं, बल्कि हमारे पूरे दिन के पुरुषार्थ पर आधारित है। अव्यक्त वाणी हमें सिखाती है:
अमृतवेले भी अव्यक्त स्थिति में वही स्थित हो सकेंगे जो सारा दिन अव्यक्त स्थिति में और अन्तर्मुख स्थिति में स्थित होंगे।
इसे सरल शब्दों में समझें: अमृतवेला की सुंदर सुबह का बीज हमारे दिन भर के कर्मों और विचारों में बोया जाता है। यदि हमारा दिन अंतर्मुखता और अव्यक्त स्थिति के अभ्यास में बीता है, तो अमृतवेला का अनुभव सहज और शक्तिशाली हो जाएगा।
बापदादा की यह शुभ इच्छा है कि हर एक बच्चा इस अव्यक्त स्थिति का अनुभव करे। वे चाहते हैं कि हम इस दिव्य मिलन के क्षण को आलस्य या सुस्ती में न गँवाएँ। अमृत वेला के लिए किया गया सही पुरुषार्थ ही उनके स्नेह का सच्चा सबूत है। यह हमारे प्रेम का प्रैक्टिकल रिटर्न है।
आइए, इस दिव्य समय को आलस्य में न गँवाएँ, बल्कि प्रेम और शक्ति से भरकर परमात्मा के स्नेह का सच्चा रिटर्न दें।
——————————————————————————–
अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे लाइक करें, कमेंट करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर ज़रूर करें।
Letest Post
{आध्यात्मिक ज्ञान }
Typically replies within minutes
Any questions related to अमृतवेला परमात्मा से मिलन का जादुई समय – Adhyatmik Gyan?
WhatsApp Us
🟢 Online | Privacy policy
WhatsApp us