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रूहानी मिलिट्री

रूहानी मिलिट्री - Ruhani Military- adhyatmikgyan.in

रूहानी मिलिट्री का यह संदेश केवल एक उपमा नहीं, बल्कि आत्मिक जीवन का आह्वान है। यह हमें चेतावनी देता है कि अब समय है आज्ञाकारी, वफादार, फरमानबरदार और ईमानदार बनने का – क्योंकि अंत में मार्शल लॉ लागू होने ही वाला है।

  • आध्यात्मिक अनुशासन की प्रेरणा: यह विचार हमें अंदर से अनुशासित करता है। जैसे फौज में समय, आदेश और ईमानदारी सबसे अहम होते हैं, वैसे ही आत्मिक जीवन में भी इन गुणों की जरूरत है।
  • रैंक और पद का स्पष्ट दृष्टिकोण: इस अवधारणा से हमें समझ आता है कि रूहानी प्रगति भी एक रैंकिंग सिस्टम के समान है – जितना समर्पण और पालन, उतना ऊंचा आत्मिक पद।
  • तत्काल अभ्यास पर बल: संदेश में बार-बार दोहराया गया है कि ‘आज बनना चाहो तो आज बन जाओ’ – यानी यह अभी के कर्मों का खेल है, कल पर निर्भर नहीं।
  • शिव बाबा और शंकर की भूमिका का प्रकाशन: यह स्पष्ट करता है कि रूहानी मार्शल शिव बाबा और शंकर हैं – जिससे एक दिव्य नेतृत्व और उद्देश्य का बोध होता है।

रूहानी मिलिट्री का यह विचार हमें जगाता है – अनुशासन, वफादारी, और आदेश पालन के महत्व को उजागर करता है। लेकिन इसे प्रेरणा और प्रेम के साथ अपनाया जाए, न कि केवल डर या दबाव से, तभी इसका सच्चा लाभ आत्मा को मिलेगा।

(Time 00:00) रूहानी मिलिट्री समय है तैयार होने का। रूहानी मिलिट्री के लिए रूहानी मार्शल की गाइडलाइंस। सबसे ऊंची मिलिट्री है। क्या? जैसे रेलवे है, फाइनेंस है। यह सब क्या नाम? गवर्नमेंट के अंग तो है ना। उनमें सबसे जास्ती खर्चा किसके ऊपर होता है? मिलिट्री के ऊपर सबसे खर्चा होता है। यह भी शिव बाबा की मिलिट्री है। क्या? रूहानी मिलिट्री। लेकिन इसमें वही लिए जाएंगे। क्या बताए? आज्ञाकारी, वफादार, फरमानबदार, ईमानदार। आज बनना चाहो तो आज बन जाओ। अब बल नंबर में चले जाओ। फर्स्ट क्लास ऊंचे ऊंचे ऑफिसर्स की कैटेगरी में आ (01:04) जाओ। अरे मिलिट्री में रैंक होते हैं कि नहीं? बाद में बनेंगे। तो नीचे रैंक में जाएंगे। नहीं बनेंगे। तो रूह वाली मिलिट्री से छूट। क्योंकि अंत में मार्शल लॉ लागू होने वाला है। ये क्या होता है? मिलिट्री में सबसे ऊंचा पार्टधारी कौन होता है? सबसे ऊंचा पदा पदाधीश कौन सा होता है? कमांडर मिलिट्री कमांडर मार्शल और हमारी रूहानी मिलिट्री का मार्शल कौन है? शंकर। तो शंकर के हाथ में सारी सत्ता आ जाएगी। क्या? अभी से अभ्यास डालो। किस बात का(02:09) आज्ञाकारी, वफादार, फरमानबरदार, ईमानदार। अभी से अभ्यास नहीं डाला तो अंत मते सो गति हो जाएगी। अभी अवज्ञा करते रहे, करते रहे, करते रहे तो अंत में क्या होगा? अवज्ञा ही कर देंगे। और शूट कर दिए जाएंगे। सूर्यवंशियों से ही बाहर ना प्रजा में आएंगे ना ऊंचा पद पाएंगे। तो क्या करना चाहिए? बहुत बढ़िया प्रश्न पूछ लिया।  

वफादारी का अर्थ है?

वफादारी का अर्थ मालूम है? हैं? पत्नी के संबंध में, पति के संबंध में वफादारी होती है। पति पत्नी के संबंध (03:13) में क्या बात गोपनीय रखने की होती है और कौन सी बात दूसरों से कहने की होती है? इसमें अंतर है या नहीं है? पति पत्नी का संबंध ऐसा प्यारा संबंध है कि अंदर की बात दोनों के बीच की बात तीसरे को अगर बता दी तो बेवफा औरत है। बेवफा आदमी है। पत्नी को मान देता है या नहीं देता है? नहीं। अगर दूसरों से बोलता है तो मान नहीं देता है। वफादार नहीं है। 

आज्ञाकारी का अर्थ है?

ऐसे ही आज्ञाकारी पिता और पुत्र के संबंध में आज्ञाकारी होना चाहिए। जो बाप ने आज्ञा की हां जी।  (04:18) ना नहीं करना है तो बाप और बेटे का संबंध पक्का है। ना कर दिया माने बाप का खून है ही नहीं। किसी दूसरे का खून बैठ गया इसके अंदर। इसको किसी दूसरे ने पैदा किया है। बाप ने पैदा नहीं किया इसलिए इंकार करता है। सूर्य का खून है ही नहीं। 

आज्ञाकारी का अर्थ है?

फरमान बरदार बाप बच्चे को माफ करता है या नहीं करता है? करता है। और गुरु, गुरु माफ नहीं करेगा। जो फरमान निकाल दिया उस फरमान को तुरंत मानना पड़े। नहीं  (05:22) माना नाफरमान खेल खलास हो गया। 

ईमानदार का अर्थ है?

ईमानदार टीचर और स्टूडेंट के संबंध में ईमानदार। टीचर जो पढ़ाई पढ़ा रहा है, जो श्रीमत दे रहा है, उस श्रीमत को ईमानदारी से पूरा करना। ऐसे नहीं आधा किया, आधा छोड़ दिया। आधा स्वार्थ में लगाया, आधा ईश्वरीय सेवा में लगाया। नहीं, पूरा ईमानदारी से काम करना। एक पैसा भी चुरा लिया या बिना बताए खर्च कर दिया तो ईमानदार है या चोर है? असंख्य चोर हरामखोरों की लिस्ट में आ जाते (06:25) हैं। कख का चोर सो लख का चोर। थोड़ी चीजें चुराई तो भी चोर। और करोड़ों रुपया चुरा के रख लिया और भाग गया तो भी चोर। तो यज्ञ की चोरी करना तो बहुत ही खराब बात है। -वीसीडी 1740 time 00:43:25

रूहानी मिलिट्री: सबसे ऊंचा स्वरूप"

  • ये बहुत ऊंची मिलिट्री है। क्या है? ऊंची। ऊंची से ऊंची मिलिट्री है। जैसे देश दे देशांतर में मिलिट्री होती है तो कितनी अटेंटिव रहती है। अलर्ट रहती है। तो ऐसे ही यह रूहानी मिलिट्री इसको बहुत अलर्ट हो के रहना है। –vcd 310 टाइम 00:35:2
  • जैसे मिलिट्री होती है तो मिलिट्री के वारियर्स को तुरंत आर्डर मिलता है और तुरंत उनको तैयार हमला करने के लिए तैयार होना पड़ता है। ऐसे तैयार रहना चाहिए क्योंकि तुम हो रूहानी वारियर। (07:28) वीसीडी 833 टाइम 20m

QUESTION -बाबा ने बच्चों को बोला है तुम अननोन वारियर्स हो पर बेरी बेलनोन वारियर्स हो तो अंत में रूहानी मिलेट्री क्या काम करेगी?

  • यही काम करेगी। जो अभी तक गुप्त है। दुनिया वाले इनको नहीं जानते हैं। यह अंडर ग्राउंड है। दुनिया वाले जानते हैं क्या? नहीं जानते। जब विनाश होगा तो ये मिलिट्री बाहर निकल पड़ेगी। सारी दुनिया में छा जाएगी। सारी दुनिया पहचान लेगी। कि अभी तक यह अननोन थे। अब अब वेरी वेल नोन हो गए। सारी दुनिया के आंखों में चमक मारेंगे। Disc 1099 time 59M

रूहानी ड्रिल-

-बाप दादा ने पहले भी एक रूहानी ड्रिल सिखाई है वो कौन सी ड्रिल है? कौन सी ड्रिल सिखाई? अभी अभी मालिक और अभी अभी बालक सोचने में भी, बोलने में भी और करने में भी। जब पूछा जाए तो मालिक बन के बताना चाहिए। अपना विचार अपना फैसला बताना चाहिए। और जब फाइनल हो जाए तो बालक बन करके मान लेना चाहिए। तो विचार देने में मालिकपन मेजरिटी के फाइनल होने के बाद बालकपन यह मालिक और बालक ये रूहानी दिल बहुत बहुत आवश्यक है। सिर्फ बाप दादा के तीन शब्द शिक्षा के याद रखो। वो तीन शब्द याद है? क्या याद है? में निराकारी हां मनसा में (09:37) निराकारी वाचा में निरंकारी निरहंकारी वाचा में से कोई ऐसा बोल ना निकले जो अहंकार पने को साबित करता हो और कर्म में कोई भी कर्म ऐसा ना हो जो विकारी कर्म साबित हो कर्मेंद्रियों से जब भी संकल्प करते हो तो निराकारी स्थिति में स्थित होकर संकल्प करो और सब कुछ भूल जाए लेकिन यह तीन शब्द ना भुलो कौन-कौन से? Vcd 112 समय 01:07:21   

  • मनसा में निराकारी 
  • वाचा में निरहंकारी 
  • और कर्मणा में निर्विकारी 

"रूहानी ड्रिल: संकल्पों पर विजय की कला"

  • रूहानी ड्रिल जानते हो जैसे शारीरिक ड्रिल के अभ्यासी एक सेकंड में जहां और जैसे अपने शरीर को मोड़ने चाहे वहां मोड़ सकते हैं। ऐसे रूहानी ड्रिल करने के अभ्यासी एक सेकंड में बुद्धि को जहां चाहो जब चाहो उसी स्टेज पर उसी परसेंटेज से स्थित कर सकते हो। ऐसे एवरेडी रूहानी मिलिट्री बने हो। अभी-अभी ऑर्डर हो अपने संपूर्ण निराकारी निरहंकारी निर्विकारी स्टेज पर स्थित हो जाओ तो क्या स्थित हो सकते हो? व साकार शरीर, साकारी सृष्टि विकारी संकल्प न चाहते हुए भी अपने तरफ आकर्षित करेंगे। इस देह के आकर्षण से परे एक सेकंड में हो सकते हो। हार और जीत का आधार एक सेकंड ही होता है। तो एक सेकंड की बाजी जीत सकते हो। ऐसे विजय अपने आप को समझते हो। अव्यक्त वाणी तारीख 1 नवंबर 1971 पृष्ठ 1 आदि। 
  • तुम जानते हो कि हम शिव शक्ति सेना है तो यह तो बच्चे जानते हो कि सेना हो यहां कोई ड्रिल वगैरह नहीं सीखनी है बच्चों को तुम बच्चों की है ही रूहानी ड्रिल तुम्हारी कोई जिस्मानी ड्रिल तो है नहीं, जो बाप समझाते आते रहते हैं बच्चे और यह ड्रिल बहुत नामी ग्रामी है भारत की क्योंकि यह है राजयोग की ड्रिल इसको कहा ही जाता है योग की ड्रिल, आत्मा को परमपिता परमात्मा के साथ योग लगाना है vcd 2169 time 50:52 m
  • अपने आप को चेक करो कि कर्मेंद्रिय जीत बने हैं। आवाज में नहीं आने चाहे तो यह मुख का आवाज अपनी तरफ खींचता तो नहीं है। इसी को ही रूहानी ड्रिल कहा जाता है। जैसे वर्तमान समय के प्रमाण शरीर के लिए सर्व बीमारियों का इलाज एक्सरसाइज सिखाते हैं। तो इस समय आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए यह रूहानी एक्सरसाइज का अभ्यास चाहिए। चारों ओर कितना भी वातावरण हो, हलचल हो, लेकिन आवाज में रहते आवाज से परे स्थिति का अभ्यास अभी बहुत काल से चाहिए। शांत वातावरण में शांति की स्थिति बनाना यह कोई बड़ी बात नहीं है। अशांति के बीच आप शांत रहो। यही अभ्यास चाहिए। अव्यक्त वाणी तारीख 16 मार्च 1986 पृष्ठ 262 अंत 263 आदि 
  • तो ये रूहानी मिलिट्री तैयार हो रही है। रूहों को पहले प्रैक्टिस कौन सी करनी है? जो रूहानी मिलिट्री के वारियर्स हैं उनको पहली पहली प्रैक्टिस कौन सी करनी चाहिए? आत्मा क्या करेंगे उसके लिए हैं? जोर से बोलो 24 घंटे यही करते रहेंगे शाकारी आकारी निराकारी शाकारी आकारी? पवित्रता को पवित्रता को जितना मानता देंगे उतनी आत्मा में पवित्रता को सिर्फ मान देने से ही हो जाएगा टिकना पड़ेगा प्रैक्टिस करनी है। सवेरे को उठ के कुछ भी याद ना आए। क्या इन आंखों से जो कुछ भी देखते हैं उनमें से कुछ भी याद ना आए। क्या याद आए? मैं आत्मा ज्योति बिंदु। बाप विवाद बाद में मैं आत्मा स्टार।(14:37) 15 मिनट, 20 मिनट, आधा घंटा यह प्रैक्टिस जितनी सवेरे उठते उठते यह संकल्प पक्का करेंगे उतनी रूहानी मिलिट्री के मजबूत वारियर बनेंगे। और वारियर ऐसा नहीं है कि वारियर हमेशा सिपाही सिपाही रहता है। सिपाही अगर अच्छा काम करे तो सबकी नजरों में चढ़ता जाता है। और वो सिपाही क्या बन सकता है? सम्राट भी बन सकता है। इसलिए होल दिल नहीं होना चाहिए। बाप तो बैठे हुए हैं। बरसों से यह बात बताए हिम्मते बच्चे अब हिम्मत ही नहीं करेंगे तो बाप मदद क्या करेंगे तो पहली पहली हिम्मत है अपने को आत्मा आत्मा अभिमानी अमृतवेले प्रैक्टिस (15:42) करने की फिर अगर सवेरे उठकर के प्रैक्टिस भी की और उसमें बहुत कुछ सफल भी हुए और प्रैक्टिस करते करते थोड़ा अलबेलापन आया और सो गए तो की हुई सारी मेहनत सब चट हो जाती है। कुंभकरण के हिस्से में चली जाती है। फिर क्या करना चाहिए? कोई जरूरी नहीं है कि 2:00 बजे 1:00 बजे ही उठा जाए। क्या अपनी शक्ति के अनुसार धीरे-धीरे धीरे-धीरे प्रैक्टिस करें। ऐसे नहीं उमंग उत्साह में आ गए। बाबा की अच्छी सी वाणी सुन ली। कोई आत्माओं ने फोर्स भर दिया। तो गैस के गुब्बारे बन गए। गैस का गुब्बारा क्या करता है? जितनी ज्यादा गैस भर जाती है तो बहुत ऊंचा उड़ता है। फिर धीरे-धीरे उसकी गैस (16:45) खत्म होने लगती है तो क्या करता है? नीचे आने लगता है। तो गैस का गुब्बारा भी नहीं बनना है। जो काम करना है दृढ़ता से करना है। करके ही छोड़ना है। अभी तो कितनी अच्छी बात बताई हुई है। संगम युग है। असंभव को संभव करने का युग। अगर संगम युग में ऐसे कार्य ना करने की हिम्मत की। हिम्मत पस्त होने लगे तो और किसी जन्म में हिम्मतवान नहीं बनेंगे। फिर पद नीचा होता रहेगा। दास दासी बनते रहेंगे। प्रजा बनते रहेंगे। Vcd 310 Time 49 m 

  • रूहानी ड्रिल आती है। ड्रिल में क्या करना होता है? ड्रिल अर्थात शरीर को जहां चाहे वहां मोड़ सकें और रूहानी ड्रिल अर्थात रूह को जहां (17:48) जैसे और जब चाहे वहां स्थित कर सकें। अर्थात अपनी स्थिति जैसी चाहे वैसी बना सकें। इसको कहते हैं रूहानी ड्रिल। जैसे सेना को मार्शल व ड्रिल मास्टर जैसे इशारा देते हैं, वैसे ही करते हैं। ऐसे स्वयं ही मास्टर व मार्शल बन जहां अपने को स्थित करनी चाहिए वहां कर सकें। ऐसे अपने आप के ड्रिल मास्टर बने हो, ऐसे तो नहीं कि मास्टर कहे हैंड्स डाउन और स्टूडेंट हैंड्स अप करें। मार्शल कहे राइट और सेना करें लेफ्ट। ऐसे सैनिकों व स्टूडेंट्स को क्या किया जाता है? डिसमिस तो यहां भी स्वयं ही डिसमिस हो ही जाते हैं। अपने अधिकार से प्रैक्टिस ऐसी होनी चाहिए जो एक (18:37) सेकंड में अपनी स्थिति को जहां चाहो वहां टिका सको क्योंकि अब युद्ध स्थल पर हो। युद्ध स्थल पर सेना अगर एक सेकंड में डायरेक्शन को अमल में ना लावे तो उनको क्या कहा जावेगा? इस रूहानी युद्ध स्थल पर भी स्थिति को स्थित करने में समय लगाते हैं तो ऐसे सैनिकों को क्या कहें? –अव्यक्त वाणी तारीख 23 अक्टूबर 1970 पृष्ठ 1 आदि । 

-वर्तमान में क्या स्थिति है रूहानी मिलिट्री की?

  • “यह देश वीर जवानों का, अलबेलों का, मस्तानों का। इस देश का यारों क्या कहना” अलबेलेपन में है, अलबेलेपन की नींद में सो रहे हैं। प्रमाद में सो रहे हैं। गफलत में (19:31) हैं या अमृतवेला सफल हो रहा है? –वीसीडी 2400 टाइम 03:24:23 

  • 78 साल पूरे होने जा रहे हैं। बाबा की पढ़ाई अभी भी चालू है। 78 साल में भी आंखें नहीं खुली हैं। अलबेलापन चालू है। इसलिए उन मुस्लिम क्रिश्चियन धर्म वालों को गुस्सा आता है। इन्होंने ऐसा अलबेलापन क्यों किया? हम तो अलर्ट रहेंगे। इसलिए देखने में आता है कि टाइम के ऊपर ज्यादा अटेंशन विदेशियों का रहता है या भारतवासियों का रहता है? लेट लतीफ (20:35) कौन होते हैं? भारतवासी लेट लतीफ होते हैं और विदेशी आज भी हां अलर्ट रहते हैं। बहुत थोड़ा टाइम हमको मिला है। और जो बहुत थोड़ा टाइम हमको मिला है यह ना अलबेले भारतवासियों के कारण मिला है। Disc – 1516 Time 00:16:04

रूहानी मिलिट्री के वॉरियर्स बनने के लिए किन धारणाओं में परिवर्तन लाएं?

रूहानी मिलिट्री - Ruhani Military- adhyatmikgyan.in

अनुशासन-

  • सबसे ऊंचा महोकमा कौन सा है?  जिसमें अनुशासन बहुत तीखा होता है। मिलिट्री तो ऐसे ही है। ये देवी देवता सनातन धर्म रूहानी मिलिट्री वाले हैं। जब बाप आते हैं तो जल्दी रूहानियत की स्टेज को पकड़ लेते हैं। d 1282 टाइम 52:38 

  • जैसे उस मिलिट्री में जब युद्ध लगता है, लड़ाई लड़ती है, (21:39) कोई जोर से और कोई योद्धा कंट्रोल से बाहर हो जाए और अपने से ऊपर के ऑफिसर की बात ना माने। मना कर दे, तो क्या करते हैं? फौरन गोली मार देते हैं। कोर्ट कचहरी नहीं चलाते? बिल्कुल कोर्ट कचहरी नहीं चलाते- वीसीडी 1998 टाइम 01:05:39 

  • अगर बाप का तंत्र है और वो तंत्र मिलिट्री तंत्र है। रूहानी मिलिट्री है। उसे कहते हैं अनुशासन। अनुशासन के हिसाब से जो निमित्त है आगे से निमित्त बना हुआ है और वो कोई गलत कदम उठा रहा है या गलत डायरेक्शन दे रहा है तो थोड़े समय के लिए उस डायरेक्शन को भी मानना पड़ता है तब तक के लिए जब तक (22:46) कि हम उस बात को ऊपर तक ना पहुंचे नहीं तो अनुशासन बिगड़ जाता है पारिवारिक व्यवस्था बनाने के लिए पहली बात है अनुशासन। अनुशासन जब टूट जाता है तो कोई भी पारिवारिक व्यवस्था स्थाई नहीं रह सकती। ऐसे नहीं कि सरेंडर होने की हिम्मत कर पाए बाद में और चाहे कि हम जो पुराने पुराने हैं उनके सर के ऊपर बैठकर के बोलेंगे। तो यह कैसे हो सकता है? आत्मा आत्मा भाई भाई वो बात ठीक है। लेकिन फिर भी यह देह का दुम साथ में जुड़ा हुआ है। इससे भी तोड़ निभानी है। दोनों बातें साथ में चलें। हां (23:52) जब देह से बिल्कुल उपराम स्टेज हो जाए फिर तो पार्टी अपना खुल जाएगा। फिर तो सबको मानना पड़ेगा कि हां ये आत्मा ऊंची है। ऊंचा बनने के लिए कोई भी प्रकार का कायदे कानून तोड़ने की जरूरत नहीं है। ला अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। कोई आत्मा हमको नीचे गिराती है। चलो हमने चुपचाप रह गए। एक कान से सुना दूसरे कान से निकाल दिया। क्या हम नीचे गिर जाएंगे क्या वास्तव में? नहीं। थोड़ा रिगार्ड हो जाता है कि हां भाई हमने रिगार्ड दिया। उन्होंने कहा हमने सुन लिया। सच्चाई तो फिर भी सच्चाई रहेगी। Ques.. वहां की वातावरण को खराब कर रहे हैं। वहां (24:50) की वातावरण को खराब कर रहे खराब कर रहे हैं तो निमित्त कौन बन रहे हैं? जो करेगा सो पाएगा या दूसरा पाएगा? यहां तो बाप के दरबार में एक एक पैसे पाई का हिसाब किताब है। जो उल्टा करेगा वो उल्टा पाएगा। अच्छा करेगा अच्छा पाएगा। वो वो बुरा करे उसको बुरा मिलेगा और हम अच्छा करते जाए तो हमको हमको अच्छा ही मिलेगा। वीसीडी 317 01:04:54

  • अभी ऐसा टाइम आने वाला है कि जैसे मिलिट्री में ऊपर वाले ऑफिसर को नीचे वाला ऑफिसर नजर उठा के नहीं देख सकता। इसे कर नहीं सकता। ऐसे ही माला का जो ऊपर वाला मणका होगा उसको नीचे वाले मके उंगली तक नहीं उठा सकेंगे अभी तो हर एक एक दूसरे को उंगली उठाई देगा आपने ऐसा (25:58) क्यों किया इन्होने ऐसा किया तो हमने ऐसा किया सीडी 258 टाइम 54:46

एकाग्रता के अभ्यासी -

  • -अरे योगी को तो ऐसा होना चाहिए कि रेलवे स्टेशन के महानगर के प्लेटफार्म फार्म पर बैठ जाए और कोई काम धंधा नहीं है। ट्रेन के आने की बाट जो रहा है, इंतजार कर रहा है तो बाबा की याद में बैठ। अब ऐसे नहीं कि कोई भिखारी निकला। अब किसी ने फूंक मारी, ट्रेन ने फूक मारी और उसकी ध्यान भंग हो जाए। ऐसा होना चाहिए। नहीं कोई उसको डिस्टर्ब ना कर सके। Disc 804 टाइम 01:16:09

रूहानी मिलिट्री अर्थात जिस्म की फिक्र से भी फारिग -

  • अभी आराम की दिनचर्या हो गई है। टीचर से क्या समझते हैं? आराम की दिनचर्या मिक्स हो गई (27:02) है। शरीर की छोटी-छोटी बीमारियों के भी बहाने बनने लग पड़ते हैं। पहले भी तो बीमारियां होती थी। लेकिन सेवा का उमंग बीमारी को मर्ज कर देता था। जब कोई आपके दिलपस सेवा होती है तो बीमारी याद आती है। अगर आपको इंचार्ज बहन कहे -नहींआपकी तबीयत ठीक नहीं है। दूसरे को करने दो। तो आप ऐसी मन मनपसंद सेवा को दूसरों को करने देंगे? उस समय बुखार व सिर दर्द महसूस होता है। कहां चला जाता है? और जब सेवा कोई पसंद नहीं होगी तो क्या होगा? सिर दर्द भी आ जाएगा तो पेट दर्द भी आ जाएगा। (28:07) सुनाया ना बुखार कहेंग तो टीचर कहेगी कि थर्मामीटर लगाओ और पेट दर्द है सिर दर्द का तो थर्मामीटर है ना होगी मूड ठीक नहीं और कहेंगे पेट दर्द है तो ये अलबेलेपन के बहाने हैं तो बेहद की वैराग वृत्ति मर्ज हो गई है। इसलिए स्वार्थ की सेवा में मन ज्यादा लगाते हैं। दौड़ के करते हैं। जहां स्वार्थ सिद्धि होती है। बेहद की वैराग्य वृत्ति में नहीं रहते। इसलिए ये बहानेबाजियां हो गई हैं। audio 274 टाइम 23:41 

  • शरीर सड़ते जावेंगे। आत्मा पावरफुल होती जावेगी। शरीर सड़ते (29:15) जावेंगे? शरीर और शरीर की इन्द्रियां सड़ती जावेंगी। आत्मा पावरफुल होती जावेगी। तो सेवा का कार्य शरीर के द्वारा करेंगे या सिर्फ आत्मा के द्वारा [संगीत] करेंगे? “देह वा पातयामि कार्यम व साधयामि” देह खलाश हो जाए कोई चिंता नहीं लेकिन जो ब्राह्मण का कार्य है मुख वंशावली ब्राह्मण का कार्य (30:22) क्या? जो बाप का धंधा वही बच्चे का धंधा -वीसीडी 2377 टाइम 02:17

  • शरीर भले कैसा भी हो लेकिन आत्मा पावरफुल होनी चाहिए। शरीर लंजम पुंजम हो बीमारियों से भले भरा पूरा हो लेकिन ईश्वरीय सेवा के लिए कभी मना नहीं करना है फदकते रहना है वीसीडी 2416 टाइम 03:35:

  • शरीर सड़ते जावेंगे आत्मा पावरफुल होती जावेगी, कितना भी शरीर सड़ता जाए ईश्वरीय सेवा में विवेदान नहीं पड़ेगा तो आत्मा पावरफुल हुई या कमजोर हुई ?आत्मा पावरफुल और क्या चाहिए ?भाग्य बनाने की बात है या कोई दूसरी बात है? कलयुग में कोई भी तरीके से भाग्य बनाना है। -वीसीडी 447 समय 00:29:48

  • शरीर सड़ता जावेगा माना पांच तत्व जड़ तत्व हैं। जड़ तत्व ज्ञान नहीं (31:29) ले सकते। इसलिए ज्ञान ना होने के कारण पांच तत्व तो बिगड़ते ही रहेंगे। इनके उत्थान होने की संभावना नहीं है। उत्थान होने की संभावना किसकी है? आत्मा की। आत्मा चैतन्य है। चैतन्य आत्मा ज्ञान उठा सकती है। इसलिए चैतन्य आत्मा को पावरफुल बनाते रहो। अगर चैतन्य आत्मा पावरफुल है तो भले तुमको ब्लड प्रेशर ही क्यों ना हो। भले तुमको कोई खराब बीमारी भी क्यों ना लग जाए। भले तुमको सूगर की बीमारी क्यों ना लग जाए तो भी तुम अपना काम ईश्वरीय सेवा छोड़ेंगे नहीं। तुम्हारी पावरफुल आत्मा सड़े हुए शरीर से भी सेवा कराती रहेगी। इसलिए बोला कि शरीर सड़ते जावेंगे (32:26) और तुम्हारी आत्मा पावरफुल होती जावेगी।

नष्टो मोहा -

  • अपनी देह से भी नष्टो मोहा कल खलास होती हो सो आज खलास हो जाए, खलास ना होती हो कल बर्फ में दबने वाली हो तो आज दब [संगीत] जाए कोई परवाह नहीं देह से नष्ट हुआ देह के जन्म जन्मांतर और इस जन्म के संबंधियों से नष्ट मोहा देह के पदार्थों से नष्ट मोहा ऐसा उनका पुरुषार्थ होगा यही उनकी पहचान होगी स्वास (33:31) स्वास उनकी स्मृति में एक बाप ही बसा [संगीत] होगा। क्या हम ऐसा करें? कितनी जल्दी हम ऐसा करके दिखाएं। जो बाप हमको अपने गले की माला बना ले। अपने गले से चिपका ले। मैं बाप के गले की माला बन जाऊं। ऐसी हरदम तमन्ना लगी हो। कठोर से कठोर काम करने के लिए तैयार हो जा वे जो बाबा ने बोला है तुम बच्चे आए हो सर हथेली पर लेकर। लो अभी काट लो। ईश्वरी यज्ञ में स्वाहा कर (34:36) दो। ऐसा पुरुषार्थ होगा उनका। 

  • DISC 903 समय 00:33:25 सरेंडर हो जाते हैं। बुद्धि कहां धरी रहती है? माताएं सरेंडर होती है। मेरा बच्चा मेरा परिवार मेरा मेरा मेरा मेरा मेरा छूटता ही नहीं। अरे परिवार सरेंडर हो गए तो बांका वही छोड़ो ना। अब वो कन्याएं भी ऐसी हैं दुनिया को दिखाने के लिए सरेंडर हो गए। हम बाबा के कंधे पर चढ़े हुए हैं। अंदर से बुद्धि सारी कहां धरी रहती है? परिवार के अंदर धरी रहती है। इंतजार होता रहता है। कब फोन आवे, कब चिट्ठी आवे, कब बुलाने आवे, नहीं तो मैं ऐसी किसी पार्टी के साथ चली जाऊं।

  • रूहानी सेना के लिए मुख्य लॉ यही है कि कभी भी अपनी देह को व अन्य देह धारी की तरफ नहीं देखना है। बाप की तरफ ही हर कदम उठाना है। यह है रूहानी सेना के लिए मुख्य लौ अगर जरा भी देहधारी व अपनी देह को देखा तो जो मंजिल है कि बाप तक पहुंचना व बाप से मिलना तो वहां तक पहुंच नहीं सकेंगे। अव्यक्त वाणी तारीख 30 जून 1974 पृष्ठ 86 (35:29) आदि 

  •  मिलिट्री में कौन भर्ती किए जाते हैं? जो मरने से डरते हो वह भर्ती किए जाते हैं या जो मरने से नहीं डरने वाले हैं वह भर्ती किए जाते हैं। जो मरने से नहीं डरते हैं वही मिलिट्री डिपार्टमेंट में आते हैं।

  •  सरेंडर हो जाते हैं। बुद्धि कहां धरी रहती है? माताएं सरेंडर होती है। मेरा बच्चा मेरा परिवार मेरा मेरा मेरा मेरा मेरा छूटता ही नहीं। अरे परिवार सरेंडर हो गए तो बांका वही छोड़ो ना। अब वो कन्याएं भी ऐसी हैं दुनिया को दिखाने के लिए सरेंडर हो गए। हम बाबा के कंधे पर चढ़े हुए हैं। अंदर से बुद्धि सारी कहां धरी रहती है? परिवार के अंदर धरी रहती है। इंतजार होता रहता है। कब फोन आवे, कब चिट्ठी आवे, कब बुलाने आवे, नहीं तो मैं ऐसी किसी पार्टी के साथ चली जाऊं। –  Disc 903 समय 00:33:25

हर परिस्थिति में मोल्डिंग पावर-

  • श्रीमत कहे यहां जाओ तो जावेंगे नहीं। कहेंगे (36:25) यहां गर्मी है। यहां ठंडी है। कुछ भी बाप की पहचान नहीं है। इनमें कौन हमको कहते हैं? यह भी समझते नहीं है। यह साधारण रथ ही बुद्धि में आता है। दो बाप बुद्धि में आता ही नहीं। बड़े-बड़े राजाओं का कितना सबको डर रहता है। उनके आगे जाने में ही थरथर हो जाते हैं। मुरली तारीख 20 फरवरी 1968 पृष्ठ एक 

  • सब बातों में सहनशीलता चाहिए। जय स्तुति, पराजय, सर्दी, गर्मी सब कुछ सहन करना है क्योंकि समय ही ऐसा है। आगे चलकर देखेंगे पानी भी नहीं मिलेगा। सूर्य अपनी तपत (37:36) दिखाएगा। दुनिया की हर चीज तमो प्रधान बनती जाती है। अभी तो यह सारी सृष्टि तमो प्रधान है। यह तत्व भी तमो प्रधान है। तो यह दुख ही देते रहेंगे। वीसीडी 1645 समय 00:12:20

  •  जो पारलौकीक स्टेज में रहने वाले बच्चे हैं, अव्यक्त स्टेज में रहने वाले बच्चे हैं, उनको रोने की दरकार है ही नहीं। रोने वाले बच्चों को बाप पसंद नहीं करते हैं। किसको पसंद करते हैं? कोई भी परिस्थिति आ जाए कैसी भी परिस्थिति आ जाए हर परिस्थिति में हर्षित मुख रहने वाले बच्चों को पसंद करती है -वीसीडी 02 समय 21:52

  • जो ज्ञानी आत्मा होगी वो हर स्थिति में अपने को सेट कर लेगी ज्ञान की पराकाष्ठा के आधार पर | वीसीडी 15 समय 55:19

  •  ज्ञान उसको कहते हैं जो हर तरीके से हर (38:42) स्थिति में हर वातावरण में हर व्यक्तियों के बीच में अपने को आर्जेसट करके दिखावे -Disc 336 समय 45:09 

यज्ञ रक्षक हर परिस्थिति में रक्षक -

  • यज्ञ का सदा आगे बढ़ना। यज्ञ को भरपूर रखना। यही यज्ञ के प्यारे बच्चों का काम है। जैसे सेंटर का चारों ओर से ध्यान रखते हैं। ऐसे ही यज्ञ का ध्यान रखना। हर एक बच्चे का कर्तव्य है। कौन से जोन वालों से बोला? इंदौर (49:33) इंडोर जोन वालों से बोला बाप दादा ने अभी तक देखा इस टर्न लेने में सभी पास हुए हैं। कोई की भी कमी नहीं रही है। तो जैसे टर्न के टाइम यज्ञ का ध्यान रखा, अनुभव किया। अभी अपने संत पर रहते भी हर एक यज्ञ रक्षक है। यज्ञ निवासी रहने बनने वाले सिर्फ ऐसे ही नहीं हो। हर एक ब्राह्मण बच्चा यज्ञ प्यारा है। यज्ञ रक्षक है। ऐसे अपने को जिम्मेवार समझ कर सदा चलना। तो जो जिम्मेवार समझेंगे वो जरूर कहां तक पहुंचेंगे? यज्ञ की अंतिम आहुति की तक पहुंचेंगे। अंतिम आहुति होगी और खेल खेल
  • जिस घर में बहुत मेहमान आते हैं उनको भाग्यशाली समझते हैं और यह तो है बेहद के बाप का घर बच्चों को मनसा वाचा कर्मणा इस घर में बहुत सर्विस करनी चाहिए और आने वाले मेहमानों की पूरी खातिरी करनी चाहिए बाबा जानते हैं कि कौन-कौन है जो एक दो का रिगार्ड रखते (39:51) हैं। पूरी खातरी करते हैं और उनकी सर्विस करते हैं। एक दो की सर्विस करनी चाहिए ना। मूड ऑफ तो नहीं करना चाहिए। एक दो में पानी होते हैं तो डिस सर्विस जरूर करते हैं। किसी यज्ञ की सेवा तो कोई महान सौभाग्यशाली को ही मिलती है सारी दुनिया को तो मिल ही नहीं सकती। वीसीडी 1646 समय 17:18
  • मुरली में बाबा ने बताया अंदर वाले कबूतर है। बाबा -अंदर जो है अंदर ही बैठे रहते हैं। बाहर निकलते ही नहीं सेवा के (40:57) लिए। अंदर वाले सेवा करते हैं। खाने के लिए करते हैं। के अतिथि सत्कार के लिए करते हैं। लक्ष्य क्या है? लक्ष्य देखा जाता है। कि जो अंदर हैं जिनको 16 घंटे सेवा करनी चाहिए वह 16 घंटे सेवा करके अंदर भावना यह रखते हैं कि जो बाहर से आने वाले अतिथि हैं बाबा के घर के बाबा के घर के मेहमान हैं उनको सुख देना है या उनको दुख देना है क्या लक्ष्य होना चाहिए सुख देना अगर है ये लक्ष्य तो कबूतर नहीं है और? और वो देखा जाए तो गिने चुने दो चार ही निकलते हैं कर्मणा सेवा करने वाले बहुत हैं। d 837 समय 26:59
  •  जो अपन को ऊंच और दूसरे की परवरिश नहीं करते हैं। अपनी देखो कितनी बहुत अच्छी परवरिश (42:04) करते हैं। दूसरों को कम करते हैं। कोई बीमार है उनकी दवाई ना करना उनको प्यार ना देना ये तो गोया लून पानी होना हो गया उस समय उनको आसुरी संप्रदाय कहें आपस में प्यार होना चाहिए दैवी गुण होना चाहिए कोई ना कोई डिफेक्ट्स तो सब में रहते हैं क्योंकि पूरा पूरा बाप को तो कोई याद नहीं करते हैं। फिर भी बाप कहते हैं अच्छा फूल बनना चाहिए। वीसीडी 1104 43:05 
  • (50:43) खलास हो जाएगा। बीच में खलास होने वाले नहीं होंगे। खलास हो जावेंगे [संगीत] नहीं जो जिम्मेवारी समझ कर चलेंगे।
  • जो भी पैसा यज्ञ में आता है उसमें बहुत पैसा कुछ ऐसा होता है जो माताएं अबलाएं बड़ी मुश्किल से पैसा निकाल करके (43:11) यज्ञ में अर्पण करती है क्या? एक एक पैसा निकाल के माताएं यज्ञ में बड़ी भावना से देती हैं। मदद करती हैं। और किस लिए मदद करती हैं? वो पैसा फालतू बातों में खर्च कर दिया जाए। वो चाहती हैं हमारा एक एक पैसा भी जो है यज्ञ में आया हुआ वो बहुत बड़ा काम करके दिखावे। क्योंकि अबलाएं मदद करती है ना। स्थापना स्वर्ग स्थापना के कार्य में उनके पैसे फिर यूं ही बर्बाद नहीं करना चाहिए। क्यों यूं ही यूं ही माने कैसे? कि उन्होंने जो पैसे दिए हैं वो श्रीमत के बर खिलाफ काम में ना चले जाए। जैसे श्रीमत है कि तुम बच्चों को महलमाड़ियां अटारियां प्रॉपर्टी नहीं बनानी है अपने (44:15) नाम से। क्या बड़े-बड़े महलमाड़ियां उठा के खर्च खड़े कर दिए। अंडर ग्राउंड कंक्रीट के मकान बना दिए। उसमें अबलाओं का बांधेली माताओं का पैसा जो थोड़ा थोड़ा पैसा इकट्ठा किया वो उसमें लगा ही दिया। बाबा कहते दुनिया का तो विनाश होने वाला है। ये मकान ये जो ऊंची ऊंची बिल्डिंग दिखाई पड़ रही हैं। ये सब खलास हो जाएंगे कि रह जावेंगे? तो ईश्वरीय यज्ञ में जो पैसा आया जिससे यह महल मानी अटारी बना के खड़े कर दिए यह पैसा बर्बाद चला जावेगा कि आबाद होगा बर्बाद चला जावेगा बाकी माउंट आबू में जो मकान बनाते हैं मधुबन में जो मकान बनाए जा रहे हैं (45:13) उनमें तो बच्चों की परवरिश विनाश के टाइम पर होगी उसके लिए नहीं बोला कहां के लिए बोला? बाहर की दुनिया में कहीं भी महल, अटारियां या प्रॉपर्टी आदि बनाने की दरकार नहीं है। तो पैसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। माताएं, अबलाएं, कुब्जाएं तुम्हारी परवरिश करती हैं फिर तुम्हारा काम है जब अकाल पड़ेगा, पड़ेगा कि नहीं? पड़ेगा। तो जिन कन्याओं माताओं ने तुम्हारी परवरिश की है तुम्हारी परवरिश में पैसा लगाया ना कि हमारी बहनें भूखी ना रहे हैं नंगी ना रहे हैं जो बरसात बरसात पड़ती है उसमें कहीं रात में जागना ना पड़े मकान टपकता रहे किराए पर मकान लेने के लिए बाबा ने (46:15) बोला तो इतनी माताएं तुम्हारी संभाल करती हैं तो किस दृष्टि से करती है। जब अकाल दुकाल पड़ेगा तो तुमको उनकी परवरिश करनी है। ऐसे नहीं तुमने यज्ञ में पैसा दिया था वो तुम्हारा खलास हो गया। अब तुम यहां क्यों आई? नहीं। हमारा फर्ज बन जाता है कि उन कन्या माताओं को जब दुनिया उनको ठुकराए देगी। तुम सब द्रोपदियां हो। बोला कि नहीं? तो सब द्रोपदियों को दुर्योधन दुशासन ठुकराएंगे या नहीं ठुकराएंगे? ठुकराएंगे। तो तुम बच्चों का फर्ज है कि उनको परवरिश अच्छे से करना। उनकी परवरिश भी करनी है। यह तुम्हारा काम है। अगर नहीं परवरिश करेंगे उनके दुख के टाइम (47:19) पर तो 100 गुना पाप बनकर के तुम्हारे सर पर चढ़ जावेगा। क्या कहा? मान लो कोई माता है। उसने अपने परिवार में लड़ाई लड़ कर के पैसा निकाला कुछ और यज्ञ में दिया या मकान ही निकाला दिया और उस बूढ़ी माता को पैसा लेकर के धन संपत्ति लेकर के लेने वालों ने बाद में दूध की मक्खी की तरह निकाल के फेंक दिया उसको लौकिक परिवार वालों के घरों में बर्तन साफ करके अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। ऐसे ढेर के ढेर मिसाल मिलेंगे तो पाप हुआ या पुण्य हुआ? अरे ईश्वर के परिवार के बच्चे और ऐसे ऐसे (48:28) काम करते हैं कि सारी धन संपत्ति हड़प ली और फिर दूध की मक्खी की तरह निकाल के फेंक दिया। ये ईश्वरीय परिवार है। लोगों को विश्वास बैठेगा या अविश्वास? अविश्वास बैठ जावेगा। तो 100 गुना पाप का बोझा चढ़ जाता है। बाप तो कहेंगे ना कि अच्छा पुरुषार्थ करके ऊंच पद पाओ। गरीबों पर, दुखियों पर रहम करो। –वीसीडी 1149 समय 01:07:20
  •  

यज्ञ रक्षक हर परिस्थिति में रक्षक -

  •  कि जनता पार्टी में संवादहीनता की भारी कमी है। एक दूसरे से बात भी खुलकर नहीं करते। इसका मतलब एक दूसरे से एक दूसरे की पटती नहीं है। शास्त्रों में भी गाया हुआ है राम की सेना माना बंदरों की सेना एक से एक बढ़कर के एक चंचल बुद्धि है। किसी से किसी की पटरी नहीं खाती। सब आपस में एक दूसरे से लड़ झगड़ (51:49) पड़ते हैं। ये हैं वही भारत के राजा हिस्ट्री में प्रसिद्ध हैं। जो आपसी लड़ाई लड़ के हिंदुस्तान का मटिया मेट कर दिया। –वीसीडी 273 समय 00:15:53
  • Disc 582 समय 27:49 आपस में बातचीत ही नहीं करना चाहते एक दूसरे से। इतनी नफरत भरी हुई है। स्वार्थ की बातों को लेकर के। अरे स्वार्थ की बातों को चलो ठीक है। लेकिन जहां सारे यज्ञ के नुकसान की बात आती है वहां तो हम एक हो के रहे। गीता पाठशाला बाप का घर है कि किसी व्यक्ति का घर है? बाप का घर है। बाप का घर है। मान लो कोई खुदानखास्त (52:58) कोई प्रकार का किसी का अपमान भी हो गया। गीता पाठशाला के इंचार्ज ने कोई अपमान भरी बात कह दी। तो शारीरिक की दृष्टि से उसको सहन कर लेने में फायदा रहेगा या नुकसान हो जाएगा? फायदा ही रहेगा। नुकसान नहीं हो सकता। संगठन को तोड़ने वाले बात करने वाले का नुकसान होगा। सहन करने वाले का नुकसान नहीं हो सकता।
  • अभी आप बताए थे मिलिट्री शासन से देश सूझेगा। हां। बिल्कुल। तो ये रूहानी मिलिट्री के बाद है या मिलिट्री के बाद रूहानी रूह को सुधारेगी और जिस्मानी जिस्मानियों को सुधारेगी जिस्मानी मिल रही है हमारी तो प्रवृत्ति मार्ग की बात है हमारी (53:49) रूह सुधरेगी तो शरीर भी सुधरेगा शरीर तो जड़ है और आत्मा चैतन्य है का बाबा हां और उसमें ज्यादा सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी है हां वो लोग कैसे आत्माएं अभी भ्रष्टाचारी हैं या श्रेष्टाचारी है आत्माएं भी भ्रष्टाचारी है इधर इधर सूक्ष्म में जब होगा तब होगा नहीं अभी भक्ति मार्ग आगे जा रहा है या ज्ञान मार्ग आगे जा रहा है अभी तो भक्ति मार्ग आगे जा रहा है दौड़ दौड़ दौड़ते दौड़ते जब रूहानी मिलिट्री आगे चली जाएगी तो परिवर्तन हो जाएगा। –Disc 1545 समय 52:39
  • यह रूहानी मिलिट्री है हमारी उनकी है जिस्मानी मिलिट्री और हमारी है रूहानी मिलिट्री। रूहानी मिलिट्री की मुख्य पावर क्या (54:55) है? जिस्मानी मिलिट्री की मुख्य पावर क्या है? जिस्मानी मिलिट्री हिंसा करती है और रूहानी मिलिट्री अहिंसा का रास्ता अपनाती है। अहिंसा भी दो प्रकार की है- एक जिस्मानी और एक है पवित्रता की। हम काम कटारी की हिंसा से भी बचते हैं और बचाते हैं। ये पवित्रता की पावर से दुनिया में सारे कम काम होते हैं। पवित्रता की पावर से ही नई दुनिया की स्थापना होगी। वाइब्रेशन से ही परिवर्तन होने लगेगा। –Disc 1180 29:39
  • लिंक -https://youtu.be/-_VTUbo0-eU?si=QYAApDBmjXkxuxuT
  •  OM SHANTI…

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