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#3 त्रिमूर्ति (एडवांस कोर्स) | ब्रह्मा बाबा में शिव की प्रवेशता | Adhyatmik Gyan

ब्रह्मा में शिव की प्रवेशता

     शिवबाप का कार्य तो रुक नहीं सकता है, वो तो एक बार आते हैं तो नई दुनिया बनाकर ही जाते हैं। उस समय (सन् 1947 में) हिन्दुस्तान-पाकिस्तान के बँटवारे की स्थिति से चारों ओर खून-खराबा व अफरा-तफरी का माहौल था। इसका लाभ उठाकर सिन्ध-हैदराबाद से अन्य सभी बाँधेली गोपियाँ व गोप भागकर एक-2 करके दादा लेखराज के पास कराची पहुँच गए। जब सन् 1947-48 तक कराची में सारा संगठन इकट्ठा हो गया, तब दादा लेखराज में रूहानी बाप शिव की प्रवेशता हुई और तब उनका नाम ‘ब्रह्मा’ पड़ा। मु.ता.17.3.73 पृ.2 मध्यांत में बोला है-

ब्रह्मा बाबा में प्रवेशता कब से हुई? प्रवेशता की निशानी क्या है?

  •  “ड्रामा में जिसका पार्ट है, उनमें ही प्रवेश करते हैं और इसका नाम ब्रह्मा रखते हैं। … अगर दूसरे में आवें तभी भी उनका नाम ब्रह्मा रखना पड़े।” 
  • इनका ब्रह्मा नाम ही तब पड़ा है, जब बाप ने आकर इनको रथ बनाया है। (मु.ता. 3.9.70 पृ.2 मध्य)
  • जो बाबा इसमें प्रवेश कर आए हैं। खुद कहते हैं- मैं इनमें प्रवेश कर इनका नाम ब्रह्मा रखता हूँ। (मु.ता. 3.5.71 पृ.1 मध्यांत)

प्रवेशता कब से हुई? प्रवेशता की निशानी क्या है? तो उसका जवाब भी मु.ता.27.10.74 पृ.2 के मध्य में दिया है-

  •  “मालूम कैसे पड़ता है कि इनमें बाप भगवान है? जब नॉलेज देते हैं।”
  • यह तो जवाहरी था ना! इनमें प्रवेशता होने से ही फट से मुरली शुरू हो गई। (मु.ता.18.8.71 पृ.4 अंत)
  • बाप कहते हैं- मैं इनमें प्रवेश करता हूँ। यह समझते हैं कि यह नया ज्ञान, नई बातें, मैं तो कुछ नहीं जानता था। (मु.ता. 08.01.63 पृ.1 आदि)

दादा लेखराज कृपलानी का जन्म प्रमाण पत्र

दादा लेखराज कृपलानी का जन्म प्रमाण पत्र- brhmakumaris

ब्रह्मा द्वारा सिर्फ माँ का पार्ट

त्रिमूर्ति रूप में प्रसिद्ध तीनों आत्माओं की अनुपस्थिति में शिवबाप ने टेम्पररी ब्रह्मा तन था।

  • बाप कहते हैं -मैं थोड़े समय के लिए लोन लेता हूँ। 60 वर्ष में वानप्रस्थ अवस्था होती है। (मु.ता. 26.10.68 पृ.2 मध्यादि) और उनके द्वारा माँ का पार्ट बजाया।
  • स्वयं मतावान के उस मुख कमल से सुनते हो। यह भगवान का लोन लिया हुआ मुख है ना, जिसको गऊ मुख भी कहते हैं। बड़ी माता है ना! (मु.ता. 28.5.70 पृ.1 मध्यांत)

शिवबाप ने ब्रह्मा बाबा के द्वारा माँ का टेम्पररी रथ का पार्ट बजाया; परन्तु ब्रह्मा बाबा पुरुष तन थे; इसलिए कन्या-माताओं की संभाल के लिए ॐ राधे मम्मा निमित्त बनती है- 

  • “असुल रियल्टी में यह (साकार ब्रह्मा) माता है; परन्तु पुरुष तन है तो माताओं की चार्ज में इनको कैसे रखा जाए। इसलिए फिर जगत अम्बा (सरस्वती ॐ राधे) निमित्त बनी हुई है।” (मु.ता. 18.5.78 पृ.2 मध्य)
  • यह दादा मम्मी भी है। वह बाप तो अलग है। … परंतु यह मेल होने कारण फिर माता मुकर्रर की जाती है। (मु.ता. 19.1.75 पृ.1 मध्यादि)

ब्रह्मा को प्रजापिता का टाइटिल

  • इस माता को भी छोड़ो, सभी देहधारियों को छोड़ो; क्योंकि अब वर्सा (देह को भूलने वाले विदेही) बाप से लेना है। (मु.ता. 4.1.73 पृ.2 मध्यादि)

     ब्रह्मा बाबा के द्वारा माँ का पार्ट चला तो अबोध बच्चे उस माँ को ही सब-कुछ समझने लगे; लेकिन बाबा ने मुरली में बोला है- माँ से वर्सा नहीं मिलता, वर्सा बाप से मिलता है। वर्सा देने वाला तो बाप प्रजापिता ब्रह्मा है, ब्रह्मा बाबा तो सिर्फ़ टाइटिलधारी हैं। सन् 1965 में ॐ राधे मम्मा ने गले के कैंसर के कारण शरीर छोड़ दिया। उसके बाद ही मुरली में आया, ता.7.9.77 पृ.2 आदि की रिवाइज़ मुरली में बोला है- 

  •   “ब्रह्माकुमारियों के आगे प्रजापिता अक्षर ज़रूर लिखना है। प्रजापिता कहने से बाप सिद्ध हो जाता है।” तब ब्रह्मा बाबा को प्रजापिता का टाइटिल मिला; लेकिन असल प्रजापिता नहीं थे जो बात पहले भी बताई है; लेकिन बच्चे ब्रह्मा को ही बाप अर्थात् प्रजापिता ब्रह्मा समझने लगे।

ब्रह्मा और प्रजापिता आत्माएँ जुदा-2

ब्रह्मा और प्रजापिता ब्रह्मा दो अलग-2 व्यक्तित्व हैं, जिनके प्रमाण बाबा ने मुरलियों में दिए हैं- वह है निराकारी आत्माओं का बाप। और फिर साकार में सब (मनुष्य मात्र) का बाप प्रजापिता ब्रह्मा है। (मु.ता.16.9.68 पृ.1 मध्यांत) बड़े-ते-बड़े बाप तो दो ही हैं- एक निराकार और एक साकार। यादगार मंदिरों में बच्चे रूप में पूजनीय कृष्ण को कभी बाप नहीं कहा जा सकता।

  •  कृष्ण तो बच्चा (बुद्धि) है। (रात्रि मु.ता. 11.3.68 पृ.1 आदि)
  •  ब्रह्मा ही फिर कृष्ण बनता है। यह कितनी गुह्य बातें हैं। (मु.ता. 3.3.73 पृ.1 मध्यांत)
  • यह है ब्रह्मा। है वो ही कृष्ण की आत्मा । (मु. ता. 27.7.65 पृ.2 अंत, 25.7.72 पृ.3 आदि)
  •  तुम बच्चे जानते हो यह दादा भी राजयोग सीख रहे हैं और कृष्ण बनने वाले हैं। (रात्रि मु.ता. 23.1.67 पृ.1 अंत)
  • ब्रह्मा नहीं शास्त्रों का सार सुनाता। वह कहाँ से सीखा? उनका भी कोई बाप वा गुरू होगा ना! प्रजापिता तो जरूर मनुष्य होगा और यहाँ ही होगा। (मु. ता. 20.10.78 पृ.2 अंत)

इन महावाक्यों के अनुसार ब्रह्मा ही कृष्ण बनने वाली आत्मा है, जो खुद किसी और से पढ़ाई पढ़ती है; इसलिए शाखों में कृष्ण को ‘संदीपन’ गुरु से शिक्षा लेते दिखाया है और आदि ॐ मंडली में प्रजापिता (भागीदार) जिनसे ब्रह्मा बाबा ने भी सीखा, वही उनके गुरु थे जो इस समय पुनर्जन्म ले साकार में भी मौजूद हैं।

  • कृष्ण को कब प्रजापिता ब्रह्मा नहीं कहा जाता। नाम गाया हुआ है ना प्रजापिता ब्रह्मा। जो होकर गए हैं, वह इस समय प्रेजेण्ट हैं। (मु.ता. 11.3.73 पृ.1 आदि)
  • प्रजापिता तो एक ही होगा ना। (मु.ता. 29.09.77 पृ.1 आदि)
  • ब्रह्मा का जन्म किससे हुआ? परमपिता परमात्मा शिव ने। (मु.ता. 24.5.73 पृ.2 अंत)
  •  प्रजापिता ब्रह्मा के ऑक्युपेशन को भी जानना चाहिए ना! (मु.ता. 28.6.68 पृ.1 आदि)

“प्रजापिता ब्रह्मा — आज भी साकार में कार्यरत”

प्रजापिता ब्रह्मा इस समय प्रैक्टिकल में हैं तभी तो हम उनके ऑक्युपेशन को जान सकेंगे। जिसने कृष्ण उर्फ ब्रह्मा बाबा को साक्षात्कारों का अर्थ बताकर ज्ञान में जन्म दिया था। भले वो पहले शरीर छोड़ दिए थे; लेकिन अभी प्रैक्टिकल में दुबारा जन्म लेकर साकार शरीर से मौजूद हैं।

  • बाप ही खुद आकर समझाते हैं- में साधारण बूढ़े तन में प्रवेश करता हूँ। नहीं तो ब्रह्मा आए कहाँ से ? पतित तन ही चाहिए। सूक्ष्मवतनवासी ब्रह्मा में विराजमान होकर तो ब्राह्मण नहीं रचेंगे। कहते हैं- मैं पतित शरीर, पतित दुनिया में आता हूँ। गाया भी हुआ है- ब्रह्मा द्वारा स्थापना।… प्रजापिता ब्रह्मा तो ज़रूर यहाँ होगा ना! सूक्ष्मवतन में कैसे प्रजा रचेंगे? प्रजापिता ब्रह्मा के बच्चे हज़ारों कुमार और कुमारियाँ हैं। झूठ थोड़े ही होगा। (मु.ता. 26.6.71 पृ.3 अंत, 4 आदि)
  •  व्यक्त प्रजापिता ब्रह्मा चाहिए। सूक्ष्मवतन में तो प्रजापिता नहीं होता है। प्रजापिता ब्रह्मा यहाँ चाहिए। (मु.ता. 5.8.73 पृ.2 मध्यान्त)
  •  ब्रह्मा (की प्रैक्टिकल यादगार भी) तो सूक्ष्मवतन में है; परंतु प्रजापिता ब्रह्मा तो ज़रूर यहाँ का ही होगा न ! (मु.ता. 25.11.73 पृ.5 मध्यांत) [मु.ता. 15.11.83 पृ.2 अंत]

“शिव का मुकर्रर रथ — प्रजापिता ब्रह्मा की सच्ची पहचान”

आदि में जब प्रजापिता में प्रवेशता हुई तब साधारण तन ही था, जिनके द्वारा ही ब्रह्मा बाबा का ज्ञान में जन्म हुआ। शिवबाप पतित तन में आते हैं; इसलिए प्रजापिता को पतित तन कहेंगे। वो सूक्ष्मवतनवासी नहीं है, वो इस साकार सृष्टि में मौजूद है। इतने 33 करोड़ ब्राह्मण सो देवता धर्म के बच्चे हैं, तो जन्म देने वाला पिता भी यहाँ होगा। सूक्ष्मवतन में तो प्रजा नहीं रची जा सकती है। ब्रह्मा बाबा तो सूक्ष्मवतनवासी /सूक्ष्म शरीरी फ़रिश्ता हो गए, जिन्हें जब्राइल के नाम से मुसलमान और क्रिश्चियन्स आज भी मानते हैं।

  •  बड़े बाप को पहचान लिया तो बेड़ा पार है। (मु.ता. 12.3.69 पृ.4 आदि) [मु.ता. 17.02.74 पृ.4 आदि) 

     दो ही बाबा हैं, एक छोटा बाबा ब्रह्मा बाबा; क्योंकि बूढ़े तन को भी बाबा कहा जाता है और दूसरा बड़ा बाबा, ब्रह्मा को भी जन्म देने वाला प्रजापिता ब्रह्मा है, उसको पहचानने से ही सद्गति होगी।

  • मुझे ब्रह्मा ज़रूर चाहिए, तो प्रजापिता ब्रह्मा भी चाहिए।… यह मेरा रथ मुकर्रर है। (मु.ता.15.11.87 पृ.3 आदि)
  • शिवबाबा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ब्र.कु. कुमारियों को वर्सा देते हैं। ब्रह्मा द्वारा शिवबाबा (शाख-प्रसिद्ध नौ कुरियों वाले) ब्राह्मण कुल की रचना रचते हैं। (मु.ता.1.3.76 पृ.3 मध्य)

“वह साधारण तन जिसमें शिव प्रवेश करते हैं — वही परमब्रह्म प्रजापिता है”

  • इस महावाक्य से स्पष्ट जाहिर होता है कि दो ज़रूर अलग-2 व्यक्तित्व हैं। प्रजापिता ब्रह्मा ही मुकर्रर रथ है, सिर्फ ब्रह्मा से ही प्रवृत्तिमार्ग के देवी-देवता बनाने का कार्य पूरा नहीं होता है। माता के साथ पिता भी चाहिए, जिसके द्वारा वर्सा मिलता है। सरस्वती तो ब्रह्मा की बेटी है, इसे प्रवृत्तिमार्ग नहीं कहेंगे।
  • यह प्रजापिता ब्रह्मा (वर्सा देने वाला) बाप भी है तो (परमब्रह्म) माँ भी है। (मु.ता. 25.4.68 की रात्रि क्लास में 27.4.68 का प्रातः क्लास पृ.। अंत) शिवबाप ने जिसमें प्रवेश किया था, वो बड़ी-ते-बड़ी माता परमब्रह्म है और उसी के द्वारा शिवबाप पिता का पार्ट भी चलाते हैं; इसलिए बाप भी है तो माँ भी।
  • शिवबाबा भी बाबा है। प्रजापिता ब्रह्मा भी बाबा है। प्रजापिता ब्रह्मा आदिदेव नाम बाला है। सिर्फ पास्ट हो गए हैं। (मु.ता. 19.9.75 पृ.1 मध्यादि)
  • परमात्मा कहते हैं- मैं जिस साधारण तन में आता हूँ, उसका नाम ब्रह्मा पड़ता है। वह सूक्ष्म ब्रह्मा है, तो दो ब्रह्मा हो गए। (मु.ता. 28.2.98 पृ.2 आदि)

जिस साधारण तन में आते हैं, वह सूक्ष्म स्टेज दादा लेखराज साकारी स्टेज वाले तो दो ब्रह्मा हो गए। वाला प्रजापिता ब्रह्मा है और एक जैसे चन्द्रमा के साथ सितारों की रिमझिम अति सुन्दर लगती है वैसे ही ब्रह्मा चन्द्रमा, (जो) बच्चे अर्थात् सितारों से ही सजते हैं। (अ.वा.ता. 2.1.78 पृ.1 मध्य)

इस महावाक्य से स्पष्ट होता है- ब्रह्मा बाबा ही कृष्ण है, वो ही ज्ञान चंद्रमा है, (गीता 4/1 का विवस्वत) सूर्य नहीं।

  • क्रियेटर ब्रह्मा को नहीं कहा जाता।(मु.ता.26.6.70 पृ.1 आदि)
  • प्रजापिता को भी क्रियेटर कहते हैं। (मु.ता. 13.2.75 पृ.2 मध्य)
  • ब्रह्मा भी रचना है शिवबाबा की (मु.ता.26.7.77 पृ.2 आदि)
  • क्रियेटर तो एक ही है। बाकी सभी पढ़ रहे हैं। इसमें यह भी आ गया। फिर भी रचना हो गए ना! (मु.ता. 8.1.68 पृ.2 अंत, 3 आदि)

"प्रजापिता ब्रह्मा: नेक्स्ट टू गॉड — सृष्टि के आदि क्रियेटर"

क्रियेटर कहा जाता है रचयिता को, ब्रह्मा बाबा के द्वारा आदि में भी रचना नहीं की गई; जबकि उनको रचने वाला प्रजापिता ब्रह्मा था, वो क्रियेटर था उनको ही शिवबाबा कहेंगे, जिनकी रचना ब्रह्मा बाबा हैं, जिस एक से सभी पढ़ते हैं। ब्रह्मा बाबा भी पढ़ते हैं; इसलिए ब्रह्मा बाबा क्रियेटर नहीं हैं।

  •  प्रजापिता ब्रह्मा तो बहुत ऊँच है ना! इनको कहेंगे नेक्स्ट टू गॉड। (मु.ता.27.11.71 पृ.6 आदि)
  • प्रजापिता ब्रह्मा की मत पर भी नहीं चलते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा की मत सो श्रीमत, ऐसे कहेंगे ना! (साकार मु. ता. 15.5.65) 

     शिवबाप का मुकर्रर रथ ही शिव समान है, इसलिए नेक्स्ट टू गॉड है, उनको ही शिवबाबा कहेंगे और उनकी मत ही श्रीमत है।

  • जगतपिता अर्थात् प्रजापिता। तो तो यहाँ ही होना चाहिए। ( मु.ता. 18.11.62 पृ.2 आदि)
  • प्रजापिता ब्रह्मा सिजरे का हेड है। (इस) समय प्रैक्टिकल में है। (मु.ता. 22.12.83 पृ.1 अंत)
  • प्रजापिता ब्रह्मा गाया जाता है ना! जिसको एडम, आदिदेव कहते हैं। (मु.ता. 29.12.84 पृ.2 अंत)
  •  प्रजापिता ब्रह्मा जिसको एडम कहा जाता। उनको ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर कहा जाता है। (मु.ता. 6.2.76 पृ.1 मध्य)
  • प्रजापिता आदिदेव कहते हैं; परंतु आदिदेव का अर्थ नहीं समझते हैं।… आदि अर्थात् शुरूआत का। (मु.ता. 4.9.72 पृ.2 आदि)
  • यह मनुष्य-सृष्टि रूपी झाड़ एक ही है। उनका एक ही बीज है।…. कपिल देव को आदिदेव ब्रह्मा भी कहते हैं (मु.ता. 19.3.73 पृ.1 आदि)
  • ब्रह्मा को कपलदेव भी कहते हैं। इनको महावीर, आदिदेव भी कहते हैं। दिलवाला भी कहते हैं। (मु.ता. 6.6.64 पृ.2 आदि)

सच्चे ब्राह्मण वही — जो प्रजापिता को पहचानें

इन महावाक्यों के अनुसार प्रजापिता के ही ये अनेक नाम हैं- आदिदेव, कपिल देव, महावीर, जो सारी मनुष्य-सृष्टि के झाड़ का बीज है। यहाँ ब्रह्मा, प्रजापिता के लिए ही बोला है- वो ब्रह्मा भी है और प्रजापिता भी। 

  • तुम अगर ब्राह्मण हो तो ब्रह्मा कहाँ है? तुम्हारा बाप कहाँ है? ब्रह्मा नाम तो कह नहीं सके। फिर तुम ब्राह्मण कैसे कहते हो? ब्राह्मण तो प्रजापिता ब्रह्मा की सन्तान थे। यह भी शरीर में है ना! अब तुम हो सच्चे ब्राह्मण और वो हैं झूठे ब्राह्मण। (मु.ता. 17.9.69 पृ.2 आदि) 
  • प्रजापिता ब्रह्मा के बच्चे ब्राह्मण ही ठहरे। ब्राह्मण तब होंगे जब प्रजापिता सम्मुख होगा। (मु.ता. 20.8.85 पृ.1 अंत) 

    ब्रह्मा अर्थात् बड़ी माँ। सिर्फ़ माँ के बच्चे होने में हम सच्चे ब्राह्मण नहीं, साथ में पिता भी होना चाहिए तब हम सच्चे ब्राह्मण होंगे। वो प्रजापिता इस समय साकार में है। अगर उस प्रजापिता को नहीं मानते तो हम झूठे ब्राह्मण हैं। जब तक मम्मा जीवित रही तब तक आसुरी प्रवृत्ति वाले बच्चे अपना प्रभाव नहीं दिखा सके; क्योंकि मम्मा स्ट्रिक्ट थी। जब मम्मा ने शरीर छोड़ दिया तो बच्चों ने ब्रह्मा माँ के प्यार को वैल्यू नहीं दी। उन आसुरी ब्राह्मणों के विपरीत आचरण से ब्रह्मा माँ का दिल टूट गया। अन्त समय में जब बाबा ने देखा कि मेरे ही बच्चे मेरे साथ दगाबाज़ी कर गए, सारी ब्राह्मणों की सत्ता उन्होंने अपनी मुट्ठी में ले ली और वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट बना लिया और मेरा नाम भी उसमें नहीं रखा। मैं जिन बच्चों को ज़्यादा अच्छा, श्रेष्ठ और सच्चा मानता, उनमें से किसी का नाम नहीं रखा गया। मुझे भी निकाल दिया गया। (16 जनवरी, 1969 को वर्ल्ड रिन्यूअल स्पिरिचुअल ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ। प्रकाशमणि दादी और रमेश भाई बम्बई गए, जब यह कारोबार चल रहा था। प्रूफ ज्ञानामृत पत्रिका मार्च, 2014 रमेश भाई के द्वारा बताया गया।) तो बाबा को सहन नहीं हुआ और 18 जनवरी, सन् 1969 में हार्टफल हो गया। ब्रह्मा बाबा सूक्ष्म शरीर धारण कर सूक्ष्मवतनवासी बन गए। (प्रूफ बुलेटिन-18.01.1969)

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